सुप्रीम कोर्ट आज वक्फ कानून की वैधता पर अंतरिम आदेश सुनाएगा, जिस पर 4 महीने पहले फैसला सुरक्षित रखा गया था और याचिकाकर्ताओं ने कानून पर रोक की मांग की थी।
वक्फ (संशोधन) कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को अंतरिम आदेश सुनाएगा। इस मामले में 22 मई को लगातार तीन दिन की सुनवाई हुई थी, जिसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को मुसलमानों के अधिकारों के खिलाफ बताते हुए अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। वहीं केंद्र सरकार ने कानून का समर्थन करते हुए इसे संवैधानिक करार देने की दलील रखी थी।
बहस का मुद्दा और अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान बहस इस बात पर केंद्रित रही कि वक्फ को इस्लाम का अभिन्न धार्मिक हिस्सा माना जाए या इसे केवल परोपकारी दान समझा जाए। सरकार ने कहा कि वक्फ धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है, जबकि याचिकाकर्ता पक्ष के वकील कपिल सिब्बल ने इसे ईश्वर को समर्पण बताया। इस पर CJI बीआर गवई ने कहा था कि धार्मिक दान केवल इस्लाम तक सीमित नहीं है, हिंदू धर्म में ‘मोक्ष’ और ईसाई धर्म में ‘स्वर्ग’ की अवधारणा इसके उदाहरण हैं। जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने भी इससे सहमति जताई थी।
सुप्रीम कोर्ट में 5 याचिकाओं पर सुनवाई
वक्फ (संशोधन) कानून की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पांच प्रमुख याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी की याचिका भी शामिल थी। CJI बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने इन पर सुनवाई की। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए, जबकि याचिकाकर्ताओं की तरफ से कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और राजीव धवन ने पैरवी की।
तीन दिन की बहस में रखे गए तर्क
20 से 22 मई तक चली लगातार तीन दिन की सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। 20 मई को कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा था कि अंतरिम राहत के लिए मजबूत दलीलें पेश करनी होंगी। 21 मई को केंद्र सरकार ने दलील दी कि वक्फ बाय यूजर कोई मौलिक अधिकार नहीं है और इसे विधायी नीति के तहत वापस लिया जा सकता है। 22 मई को SG मेहता ने सेक्शन 3E का जिक्र करते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों की भूमि पर वक्फ मान्य नहीं होगा। वहीं, कपिल सिब्बल ने इसे ऐतिहासिक और संवैधानिक सिद्धांतों की अनदेखी बताया और सरकार पर गैर-न्यायिक तरीके से वक्फ संपत्तियां कब्जाने का आरोप लगाया।


