पूर्व अमेरिकी NSA ने आरोप लगाया कि ट्रम्प ने पाकिस्तान में फैमिली बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए भारत से रिश्ते खराब किए और निजी फायदे को प्राथमिकता दी।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प ने पाकिस्तान से फैमिली बिजनेस के फायदे के लिए भारत के साथ अमेरिका के रिश्तों को नुकसान पहुंचाया। सुलिवन का कहना है कि ट्रम्प ने निजी लाभ के लिए भारत-पाक संघर्ष रुकवाने का दावा किया और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को खुश करने की कोशिश की। उनका मानना है कि ऐसे फैसलों का नुकसान पूरे देश को उठाना पड़ेगा।
भारत-अमेरिका रिश्तों की अहमियत
सुलिवन ने कहा कि अमेरिका हमेशा भारत के साथ मजबूत संबंध बनाने की कोशिश करता रहा है क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। उन्होंने जोर दिया कि तकनीक, टैलेंट, आर्थिक सहयोग और खासकर चीन से रणनीतिक खतरे से निपटने के लिए भारत की साझेदारी बेहद जरूरी है। सुलिवन का कहना है कि ट्रम्प द्वारा भारत से रिश्ते बिगाड़ना एक बड़ी रणनीतिक भूल है, क्योंकि एक मजबूत अमेरिका-भारत संबंध दोनों देशों के हित में है और दुनिया के लिए स्थिरता लाता है।
पाकिस्तान में ट्रम्प परिवार का बड़ा समझौता
मार्च 2025 में पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल (PCC) की स्थापना के तुरंत बाद, ट्रम्प परिवार से जुड़ी कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) ने पाकिस्तान सरकार के साथ ब्लॉकचेन और क्रिप्टो को बढ़ावा देने का करार किया। इस कंपनी में एरिक ट्रम्प, डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर और दामाद जेरेड कुशनर की 60% हिस्सेदारी है। करार के दौरान पाकिस्तान के पीएम, सेना प्रमुख और कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद थे, जबकि कंपनी की ओर से जैकरी फोकमैन और जैकरी विटकॉफ ने भाग लिया। इस समझौते ने WLF को पाकिस्तान जैसे बड़े बाजार में एंट्री दिलाई और उसके टोकन (WLFI) की वैल्यू में भारी उछाल आया। इससे ट्रम्प परिवार की संपत्ति अरबों डॉलर बढ़ी और उन्हें राजनीतिक पूंजी भी हासिल हुई।
भारत के खिलाफ टैरिफ और बदलता रुख
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के साथ इस डील के बाद ट्रम्प का रुख भारत के प्रति बदल गया। जहां पाकिस्तान पर अमेरिका ने केवल 19% टैरिफ लगाया, वहीं भारत पर ट्रम्प ने पहले 25% और फिर उसे बढ़ाकर 50% तक कर दिया। उन्होंने इसका कारण भारत का रूस से तेल खरीदना बताया, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यही तेल चीन भी खरीद रहा है, फिर भी उस पर कोई अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के साथ हुए इस करार ने ट्रम्प को भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ गया।


