पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निपटान को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान छिड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा कचरा जलाने पर रोक से इनकार किए जाने के बाद, हाईकोर्ट के आदेशानुसार रामकी प्लांट में तीन चरणों में इसका ट्रायल शुरू कर दिया गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है, और विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है।
सरकार जनता को दे रही ज़हर
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कचरा जलाने की प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह जहरीला धुआं स्थानीय लोगों की सेहत पर बुरा असर डालेगा और इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। पटवारी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जनता की सुरक्षा को नजरअंदाज कर औद्योगिक लाभ के लिए खतरनाक कदम उठा रही है। उन्होंने इस मुद्दे पर जनता से जागरूक होने और इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।

पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि यह जहरीला कचरा जलाने से हवा में घातक रसायन फैल सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे खतरनाक अपशिष्ट के निपटान के लिए सख्त मानकों का पालन किया जाना चाहिए, ताकि इसका असर आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों पर न पड़े। विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच, प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि क्या यह कदम जनता के हित में है या केवल कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए उठाया गया है।
कड़ी सुरक्षा में शुरू हुआ ‘यूका’ कचरे का निपटान
पीथमपुर के रामकी प्लांट में यूनियन कार्बाइड (यूका) के कचरे को जलाने की प्रक्रिया सख्त निगरानी और कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हो गई है। 500 से अधिक जवानों की तैनाती के साथ, मध्य प्रदेश और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमों ने पांच कंटेनरों से अपशिष्ट निकालकर उसे इंसीनेटर में डालने की प्रक्रिया शुरू की। 850 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किए जाने के बाद, यह अपशिष्ट 72 घंटे के भीतर पूरी तरह जलाया जाएगा। इस दौरान, कमिश्नर दीपक सिंह और आईजी अनुराग प्लांट स्थल पर मौजूद रहकर पूरी स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

खतरनाक अवशेषों की निगरानी जारी
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल ऑफिसर श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि शीर्ष अदालत द्वारा रोक से इनकार करने के बाद, पहले चरण का ट्रायल शुरू किया गया है। पांच तरह के अपशिष्ट, जिनमें सेविन (कीटनाशक), रिएक्टर अवशेष, यूका परिसर की मिट्टी, नेफ्थॉल अवशेष और सेमी प्रोसेस्ड अवशेष शामिल हैं, को विशेष प्रक्रिया से मिक्सर में मिलाकर 10 टन कचरा तैयार किया जा रहा है। इसे जलाने की प्रक्रिया के दौरान प्रदूषण स्तर की बारीकी से निगरानी की जा रही है, ताकि इसके पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर प्रभाव को मापा जा सके।



