कैग रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार की नई शराब नीति से सरकार को करीब 2000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। पहले की नीति में एक व्यक्ति को सिर्फ एक लाइसेंस मिलता था, लेकिन नई नीति में एक व्यक्ति को दो दर्जन से अधिक लाइसेंस दिए जाने की अनुमति दी गई। पहले 60% शराब की बिक्री सरकारी निगमों द्वारा होती थी, लेकिन नई नीति में निजी कंपनियों को रिटेल लाइसेंस लेने की छूट दे दी गई। इसके अलावा, शराब बिक्री पर कमीशन 5% से बढ़ाकर 12% कर दिया गया, जिससे सरकारी राजस्व में भारी नुकसान हुआ।

नियमों का उल्लंघन और लाइसेंसिंग में गड़बड़ियां
कैग रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि थोक लाइसेंस शराब वितरकों और निर्माताओं को भी दिए गए, जो नियमों का उल्लंघन था। इससे बाजार में एकाधिकार (monopoly) जैसी स्थिति बन गई और छोटे व्यापारियों को नुकसान हुआ। इसके अलावा, लाइसेंस देने से पहले किसी भी प्रकार की आर्थिक या आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच नहीं की गई, जिससे सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल उठे। लिक्वर जॉइनिंग के लिए 100 करोड़ के न्यूनतम निवेश की शर्त को भी खत्म कर दिया गया, जिससे योग्य निवेशकों की बजाय संदिग्ध कंपनियों को लाभ मिला।
राजनीतिक हस्तक्षेप और भाई-भतीजावाद का आरोप
कैग रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि शराब लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कंपनियों और व्यक्तियों को पक्षपातपूर्ण तरीके से लाइसेंस दिए गए, जिससे भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। इस घोटाले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखे हमले किए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। विधानसभा में इस मुद्दे पर सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
कैग रिपोर्ट में शराब नीति से 2000 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा
भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के अनुसार, 2021-22 की आबकारी नीति से दिल्ली सरकार को 2000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। इस नीति को बनाने में एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को नजरअंदाज किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 941.53 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान सिर्फ गलत नीतियों के कारण हुआ। इसके अलावा, गैर-अनुरूप नगरपालिका वार्डों में शराब की दुकानें खोलने के लिए आवश्यक अनुमति भी समय पर नहीं ली गई, जिससे 890.15 करोड़ रुपये का अतिरिक्त घाटा हुआ।

लाइसेंसिंग प्रक्रिया में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार के आरोप
कैग रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि लाइसेंसधारियों को अनियमित अनुदान और छूट देने के कारण 144 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ। कुछ लाइसेंसधारियों को 114.50 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस में छूट दी गई, जबकि यह प्रस्ताव विभाग के प्रभारी मंत्री द्वारा पहले खारिज कर दिया गया था। 28 दिसंबर 2021 से 27 जनवरी 2022 के बीच बंद दुकानों को छूट देने का निर्णय लिया गया, जिससे सरकार को और नुकसान हुआ। इन अनियमितताओं के चलते मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह जैसे आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं को महीनों जेल में रहना पड़ा।
विधानसभा में कैग रिपोर्ट पर गरमाई सियासत
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कैग रिपोर्ट को लेकर कहा कि पिछली सरकार ने जानबूझकर इस रिपोर्ट को रोके रखा था और समय रहते इसे उपराज्यपाल को नहीं भेजा गया। उन्होंने मांग की कि हर विभाग की कैग रिपोर्ट को विधानसभा में पेश किया जाए। वहीं, भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली ने इस मुद्देपर आम आदमी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि क्या भगत सिंह ने यह कहा था कि शराब और शिक्षा घोटालों में फंसकर जेल जाओ? उन्होंने दिल्ली और पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए, जिससे विधानसभा में तीखी बहस छिड़ गई।


