विधानसभा में महाकुंभ के दौरान नाविकों की भूमिका को लेकर विपक्ष के आरोपों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जोरदार पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने कभी भी नाविकों का शोषण नहीं किया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए हरसंभव सहयोग किया। विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने तथ्यों के साथ जवाब दिया कि महाकुंभ में नाविकों को व्यापक अवसर मिले, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। उन्होंने इसे सरकार की योजनाओं और कुशल प्रबंधन का परिणाम बताया।
नाविकों के लिए बना सुनहरा अवसर
मुख्यमंत्री ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक नाविक परिवार, जिसके पास 130 नावें थीं, ने महज 45 दिनों में 30 करोड़ रुपये की शुद्ध कमाई की। यानी एक नाव ने औसतन 23 लाख रुपये कमाए, जो इस आयोजन की आर्थिक सफलता को दर्शाता है। यह न केवल नाविकों की कड़ी मेहनत को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि महाकुंभ जैसे आयोजनों से स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलता है। इस तरह, महाकुंभ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ आर्थिक उन्नति का भी माध्यम बना।
नाविकों की समृद्धि की नई कहानी
महाकुंभ में इस बार 20,000 से अधिक नाविकों ने श्रद्धालुओं को संगम में पुण्य की डुबकी लगवाने में मदद की। इससे उन्हें स्थायी रोजगार के साथ-साथ बड़ी आर्थिक सफलता भी मिली। कई नाविक परिवारों ने न केवल अपना भरण-पोषण किया, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति को इतना मजबूत किया कि वे समृद्धि की नई कहानी लिखने लगे। यह आयोजन साबित करता है कि धार्मिक आयोजनों का प्रभाव केवल आध्यात्मिक नहीं होता, बल्कि यह हजारों परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का जरिया भी बनता है।

महाकुंभ ने बढ़ाया रोजगार, नाविकों की बदली किस्मत
महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार का अवसर भी बना। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि 3,500 से अधिक नावों ने डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं को संगम स्नान कराया। प्रयागराज के साथ ही मीरजापुर, भदोही, वाराणसी, कानपुर, अयोध्या और कौशांबी से आए नाविकों ने इस आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नाविक संघ के अध्यक्ष पप्पू लाल निषाद ने इसे मां गंगा और यमुना का आशीर्वाद बताया, जिससे हजारों परिवारों को आजीविका मिली। छोटी नावें तीन परिवारों का भरण-पोषण करने में सक्षम रहीं, जबकि बड़ी नावों से पांच परिवारों की रोजी-रोटी चली।
न्यूनतम आय 15,000 प्रतिदिन
इस महाकुंभ में नाविकों की कमाई ने सभी को चौंका दिया। पूरे मेले के दौरान एक नाविक की न्यूनतम आय प्रतिदिन लगभग 15,000 रुपये रही, जिससे उनके जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर सफाईकर्मियों, सुरक्षा बलों और स्वास्थ्यकर्मियों के योगदान को भी सराहा और उनके सम्मान समारोह की घोषणा की। इसके अलावा, नाविकों के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा भी की गई, जिससे उनकी आजीविका और सुदृढ़ होगी। महाकुंभ ने धार्मिक महत्व के साथ-साथ आर्थिक दृष्टि से भी हजारों परिवारों को समृद्ध बनाने में अहम भूमिका निभाई।



