भारतीय जनता पार्टी के मध्य प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संगठन निर्माण में जिस अभूतपूर्व गति का परिचय दिया है, वह प्रदेश राजनीति में एक मिसाल बन गया है।

मात्र तीन महीनों के भीतर प्रदेश कार्यसमिति का गठन कर उन्होंने अनुभव, बुद्धि, विवेक और रणनीति को जिस प्रकार एकसाथ साधा, वह उनके संगठनात्मक कौशल का सशक्त प्रमाण है। यह वही प्रक्रिया है जिसे कांग्रेस जैसे प्रमुख विपक्षी दल ने पूरा करने में लगभग सवा साल का समय लिया था। दोनों दलों की तुलना यह दर्शाती है कि खंडेलवाल ने पांच गुना तेजी से न सिर्फ समिति बनाई, बल्कि एक ऐसी संरचना खड़ी की जिसमें गति, प्रगति, संवेग और नवाचार समान रूप से दिखाई देते हैं। उनकी यही कार्यशैली प्रदेश संगठन को नए रूप में गढ़ते नेतृत्व की ओर इशारा करती है।
नारी शक्ति को आगे बढ़ाने का दृष्टिकोण
कार्यसमिति के गठन में खंडेलवाल ने सिर्फ संगठनात्मक विस्तार पर ही ध्यान नहीं दिया बल्कि क्षेत्रीय, सामाजिक और वर्गीय संतुलन को भी प्राथमिकता दी। बुंदेलखंड, महाकौशल, मालवा, विंध्य, मध्य क्षेत्र और निमाड़ जैसे सभी प्रमुख हिस्सों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करते हुए उन्होंने एक व्यापक और प्रतिनिधिक टीम तैयार की। इसी के साथ सभी जातियों और वर्गों की भागीदारी को स्थान देकर उन्होंने संगठनात्मक समावेशिता को मजबूत किया। विशेष रूप से लगभग 30% पदों पर महिलाओं को स्थान देना न केवल नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है बल्कि भाजपा के भीतर महिला नेतृत्व को सशक्त बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम है। उनकी यह चयन प्रक्रिया बताती है कि संगठन विस्तार के साथ-साथ नेतृत्व का भविष्य भी ध्यान में रखा गया है।
बूथ स्तरीय मजबूती और प्रदेशव्यापी संवाद
खंडेलवाल का सबसे बड़ा फोकस बूथ स्तर पर संगठन को जीवंत और मजबूत बनाना है। प्रदेश के 65 हजार से अधिक बूथों पर सक्रिय लगभग 42 लाख कार्यकर्ताओं से सतत संवाद और संपर्क स्थापित करके वे जमीनी संगठन को सुदृढ़ कर रहे हैं। प्रदेश की परिक्रमा करते हुए वे लगातार कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं, उनके सुझाव सुन रहे हैं और उन्हें संगठन के अगले लक्ष्यों से जोड़ रहे हैं। पार्टी के उन बूथों को, जहां अभी विजय नहीं मिल सकी है, ‘आकांक्षी बूथ’ का नया नाम देकर उन्होंने भविष्य के चुनावों में जीत की नई रणनीति का आधार रखा है। यही नहीं, चरणबद्ध कार्ययोजना और उत्साहवर्धन के माध्यम से कार्यकर्ताओं को विजय पथ पर ले जाने की उनकी नीति संगठनात्मक ऊर्जा को कई गुना बढ़ा रही है। संभागों के पुनर्गठन और छिंदवाड़ा-मंदसौर जैसे क्षेत्रों को नए संभाग के रूप में आकार देना भी उनके नवाचार की स्पष्ट झलक है।

मोर्चों, प्रकोष्ठों और अनुशासन में दृढ़ता
प्रदेश अध्यक्ष के रूप में खंडेलवाल ने भाजपा के मोर्चों और प्रकोष्ठों को सक्रिय करने में बिल्कुल भी समय नहीं गंवाया। पिछड़ा वर्ग, युवा, महिला, किसान, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्षों की तुरंत नियुक्ति कर उन्होंने इन इकाइयों में नई ऊर्जा भर दी। सोशल मीडिया विभाग, मोर्चा प्रभारी, प्रकोष्ठ प्रभारी और कार्यालय व्यवस्था प्रभारी की नियुक्ति ने संगठनात्मक धार को और मजबूत किया। साथ ही अनुशासन को लेकर उनकी नीति बेहद स्पष्ट रही—पार्टी लाइन के विरुद्ध जाने वाले नेताओं पर सख्त कार्रवाई की गई और कई को निष्कासित भी किया गया। उनकी यह कठोरता संगठन में अनुशासन और मर्यादा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकेत देती है, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच एक स्पष्ट संदेश जाता है कि पार्टी हित सर्वोपरि है। उनकी यह शैली संगठन को ‘कमल व्यूह’ या ‘पद्म व्यूह’ जैसी संरचना में ढालने की दिशा में निर्णायक कदम है।
नैतिक आदर्शों पर आधारित नेतृत्व
राजनीतिक यात्रा युवा मोर्चा से शुरू करने वाले खंडेलवाल भाजपा के बैतूल लोकसभा सांसद रहे हैं और वर्तमान में विधायक हैं। उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में संयोजक के रूप में 29 सीटों पर जीत दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाई। अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा, डिजिटल सुरक्षा, अनावश्यक सुविधाओं को लौटाने जैसे कदम उठा कर नैतिक नेतृत्व का उदाहरण पेश किया है। उनका नेतृत्व आज भाजपा संगठन को गज-केसरी जैसा मजबूत ढांचा देने की दिशा में अग्रसर है।

लेखक – सत्येंद्र कुमार जैन


