सीरिया के अलेप्पो प्रांत में हुए कार बम विस्फोट ने एक बार फिर क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को उजागर किया है। मनबीज शहर के बाहरी इलाके में खेतिहर मजदूरों को ले जा रही कार में हुए धमाके में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें 14 महिलाएं शामिल थीं। इस हमले में 15 अन्य महिलाएं भी घायल हुई हैं। लगातार हो रहे ऐसे हमले यह दर्शाते हैं कि सीरिया की अस्थिरता अभी खत्म नहीं हुई है और आम नागरिकों की सुरक्षा खतरेमें बनी हुई है।
आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष, चुनौतियों से घिरी अंतरिम सरकार
सीरिया में हाल ही में बनी अंतरिम सरकार को इस्लामिक स्टेट (ISIS) और अन्य आतंकी संगठनों से लगातार चुनौती मिल रही है। मनबीज में इससे पहले भी बम धमाके हो चुके हैं, जिससे यह साफ होता है कि आतंकवादी समूह अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए हिंसा का सहारा ले रहे हैं। पिछले साल दिसंबर में तख्तापलट के बाद भी क्षेत्र में शांति स्थापित नहीं हो पाई है। शनिवार को भी एक कार बम धमाके में 4 नागरिकों की मौत और 9 के घायल होने की खबर सामने आई थी। लगातार बढ़ती हिंसा को देखते हुए सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
सऊदी यात्रा से बदलेंगे क्षेत्रीय समीकरण?
सीरिया के नए राष्ट्रपति अबु मोहम्मद अल जुलानी ने पद संभालने के तुरंत बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए सऊदी अरब का रुख किया है। इस कदम को सीरिया की विदेश नीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। जुलानी सीरिया की ईरान समर्थक छवि को बदलने और अरब देशों के साथ नए संबंध स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। सऊदी अरब, जिसने एक समय बशर अल असद के खिलाफ विद्रोह को समर्थन दिया था, अब सीरिया के साथ अपने संबंधों को फिर से परिभाषित कर सकता है।

विद्रोह से सत्ता तक का सफर
अबु मोहम्मद अल जुलानी ने लंबे समय तक अपने संगठन तहरीर अल शाम (HTS) को मजबूत करने में लगाया। उन्होंने चीन के उईगर मुसलमानों, अरब देशों और मध्य एशिया के लड़ाकों को अपनी फौज में शामिल किया। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते रूस ने अपने सैनिकों को सीरिया से हटा लिया, जिससे सीरियाई सरकार कमजोर हो गई। 2023 में इजराइल-हमास युद्ध शुरू हुआ, जिससे ईरान और हिजबुल्लाह का ध्यान बंट गया। इस मौके का फायदा उठाकर जुलानी ने सीरियाई सेना पर हमला किया और 11 दिन के भीतर बशर अल असद का तख्तापलट कर दिया।
सीरिया का भविष्य और वैश्विक असर
अब जब जुलानी सत्ता में हैं, तो सीरिया की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ईरान और रूस, जो अब तक सीरिया के प्रमुख सहयोगी थे, अब खुद को एक नई परिस्थिति में पा सकते हैं। वहीं, सऊदी अरब और अन्य अरब देशों के साथ जुलानी की नजदीकियां क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बदल सकती हैं। हालांकि, सीरिया में शांति और स्थिरता बहाल करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि कई आतंकी और विद्रोही गुट अब भी सक्रिय हैं।



