मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा में कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के संकल्प को ‘मेक इन मध्यप्रदेश’ के रूप में साकार कर राज्य निवेश आकर्षण की नई परिभाषा गढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में प्रदेश की औद्योगिक तरक्की और निवेश संवर्धन पर सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसमें मध्यप्रदेश ने भी एक अग्रणी भूमिका निभाई है। ‘मेक इन इंडिया’ के दृष्टिकोण को ‘मेक इन मध्यप्रदेश’ के रूप में अपनाते हुए, प्रदेश ने पिछले 18 महीनों में खुद को एक नई पहचान और प्रतिष्ठा दी है। अब मध्यप्रदेश केवल कृषि या खनिज उत्पादन में अग्रणी नहीं, बल्कि इन संसाधनों के प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। इससे न केवल किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा, बल्कि राज्य में हजारों नए रोजगार भी सृजित होंगे। सिंचाई क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाते हुए 5 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 52 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया गया है, जिससे कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा मिली है।
लोकल से ग्लोबल की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश
डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब औद्योगिक, कृषि, फार्मा और रक्षा निर्माण में ग्लोबल सप्लाई हब बनता जा रहा है। आयशर मोटर्स और फोर्स मोटर्स जैसे ब्रांड्स के वाहन आज अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया तक पहुंच चुके हैं। भोपाल स्थित BHEL और मंडीदीप में बने पावर ट्रांसफॉर्मर देश-विदेश में ऊर्जा आपूर्ति कर रहे हैं। महेश्वरी और चंदेरी साड़ियाँ G.I. टैग के साथ जापान और यूरोप तक निर्यात हो रही हैं, वहीं झाबुआ, मंदसौर और नीमच के ऑर्गेनिक मसाले अंतरराष्ट्रीय रसोई में जगह बना चुके हैं। कोदो, कुटकी और बाजरा जैसे मिलेट्स की वैश्विक मांग बढ़ी है, और स्विट्जरलैंड के व्यापारी इन पर निवेश में रुचि दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश ‘लोकल से ग्लोबल’ की यात्रा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
प्रदेशभर में समावेशी विकास और ऐतिहासिक निवेश का दौर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के हर क्षेत्र को समान रूप से आगे बढ़ाना है। क्षेत्रीय असमानता को खत्म करने के लिए रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव जैसे आयोजन कर हर संभाग की संभावनाओं को निवेशकों के सामने रखा गया। बीते वर्ष में 77 औद्योगिक इकाइयों का लोकार्पण हुआ, जिससे ₹1374 करोड़ का निवेश और 4800 से अधिक रोजगार सृजित हुए। वहीं 151 नई इकाइयों के भूमि पूजन से ₹7336 करोड़ के निवेश और 13,700 रोजगार का अनुमान है। कुल 789 औद्योगिक परियोजनाओं को ₹28,722 करोड़ के निवेश और 66,550 संभावित रोजगार के साथ भूमि आवंटन हेतु आशय पत्र जारी किए गए। इस दिशा में सरकार ने मजबूत आधारशिला रखी है, जो प्रदेश को निवेश का नया गढ़ बना रही है।
GIS 2025 और वैश्विक मंच पर मध्यप्रदेश की मजबूत उपस्थिति
GIS 2025 का भोपाल में आयोजन राज्य के औद्योगिक इतिहास का मील का पत्थर साबित हुआ, जिसमें 65 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और 25,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। इसमें कुल ₹30.77 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जबकि GIS, RICs और रोड शो के आधार पर ₹1.52 लाख करोड़ के निवेश से 254 उद्योगों को भूमि आवंटित की गई, जिससे 1.82 लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे। खनिज, पर्यटन, टेक्नोलॉजी और स्किलिंग में भी प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है, जहाँ 3.22 लाख करोड़ के खनिज निवेश प्रस्ताव और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों जैसे IBM, Microsoft के साथ MOU प्रक्रियाधीन हैं। औद्योगिक अधोसंरचना के विकास पर ₹2000 करोड़ से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि मध्यप्रदेश अब वैश्विक व्यापार के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है।


