
ख़बर दुनिया से जुड़ी है जहां अब एच-1बी वीज़ा की बात करें तो ट्रम्प की संभावित सख्तियां से बचने की तैयारी करने लगीं कंपनियां। खबरों की मानें तो अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 20 जनवरी को शपथ लेंगे और ऐसी संभावना जताई जा रही है कि ट्रम्प प्रशासन प्रवासियों के लिए सख्ती बरतेगा। इसमें एच-1बी वीज़ा की संख्या में भी कटौती संभव है। इस चुनौती से निपटने के लिए पहले से ही कंपनियां तैयारी कर रही हैं।
क्या खास बात है रिपोर्ट में
रिपोर्ट के अनुसार, अब अमेरिकी कंपनियों ने एच-1बी वीज़ा की अनिश्चितताओं से बचने के लिए रिमोट हायरिंग शुरू कर दी है। बता दें कि इस व्यवस्था में कर्मचारी को अमेरिका आना जरूरी नहीं होगा। वह अपने देश में रहकर ही कंपनी के काम को अंजाम दे सकते हैं। ट्रम्प की संभावित सख्तियों के अलावा इसके पीछे की वजह एच-1बी वीज़ा का महंगा भी होना है। कंपनियों का कहना है कि इससे उन्हें अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसके अलावा एच-1बी वीज़ा प्रक्रिया का जटिल होना भी है। आपको बता दें कि एच1-बी वीज़ा लेने में भारतीय सबसे आगे हैं। अमेरिकन इमिग्रेशन काउंसिल के अनुसार, एच-1बी वीज़ा की सीमा प्रतिवर्ष 85 हजार है, लेकिन खास मामलों में यह संख्या बढ़ जाती है। 2023 में यह आंकड़ा 3.86 लाख तक पहुंच गया था। इनमें से भारतीयों को 72.3% एच1- बी वीज़ा मिला। 2022 में कुल 3.2 लाख एच1-बी वीज़ा में से 77% वीज़ा भारतीयों को मिले।


