अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। ट्रम्प ने अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में दिए बयान में जेलेंस्की को ‘तानाशाह’ कहा, जिससे दोनों नेताओं के बीच विवाद और गहरा गया। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में भी जेलेंस्की पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘बिना चुनाव वाला राष्ट्रपति’ और ‘मामूली कॉमेडियन’ बताया। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई।
जेलेंस्की ने ट्रम्प पर किया पलटवार
ट्रम्प के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए जेलेंस्की ने कहा कि ट्रम्प गलत जानकारी के बुलबुले में जी रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी अप्रूवल रेटिंग 58% है और यूक्रेनी जनता अभी भी उन पर भरोसा करती है। जेलेंस्की ने कहा कि रूस लगातार अमेरिका और अन्य देशों में झूठी सूचनाएं फैला रहा है, जिससे ट्रम्प प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने ट्रम्प के इस दावे को भी खारिज किया कि यूक्रेन में उनकी लोकप्रियता मात्र 4% रह गई है।
यूरोपीय देशों ने किया जेलेंस्की का समर्थन
ट्रम्प के जेलेंस्की पर हमले के बाद यूरोपीय नेताओं ने यूक्रेनी राष्ट्रपति के समर्थन में बयान दिए। जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज ने कहा कि जेलेंस्की की लोकतांत्रिक वैधता पर सवाल उठाना पूरी तरह गलत है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी जेलेंस्की को फोन कर अपना समर्थन जताया और कहा कि युद्धकाल में चुनाव टालना उचित निर्णय था। कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने भी ट्रम्प के बयान की आलोचना की।

यूक्रेन में चुनाव टलने पर क्या है विवाद?
यूक्रेन में राष्ट्रपति चुनाव फरवरी 2022 में रूस के हमले के बाद से स्थगित कर दिए गए हैं। देश में सैन्य शासन लागू होने के कारण नए चुनाव नहीं हो सके हैं, जिसके चलते जेलेंस्की का कार्यकाल बढ़ा दिया गया। ट्रम्प का आरोप है कि जेलेंस्की बिना चुनाव के सत्ता में बने हुए हैं, जबकि यूक्रेनी सरकार का कहना है कि युद्ध के हालात में चुनाव कराना संभव नहीं है। पश्चिमी देशों ने भी इस फैसले का समर्थन किया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर ट्रम्प की अलग राय
ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। वे पहले भी कह चुके हैं कि अगर वे सत्ता में लौटते हैं तो रूस-यूक्रेन युद्ध को 24 घंटे में खत्म कर देंगे। हालांकि, उनके इस दावे पर कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। वहीं, जेलेंस्की का कहना है कि ट्रम्प की यह सोच रूस के पक्ष में जाती है और इससे यूक्रेन को नुकसान हो सकता है। इस जुबानी जंग के बीच अमेरिका और यूरोप की यूक्रेन नीति पर भी नए सिरे से बहस



