अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर शनिवार तक इजराइली बंधकों को रिहा नहीं किया गया, तो गाजा में सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सीजफायर का फैसला इजराइल को ही लेना है, लेकिन बंधकों की रिहाई एक साथ होनी चाहिए, न कि कुछ-कुछ करके। ट्रंप के इस बयान से मध्य पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल और गरमा गया है।
इजराइल और हमास के बीच सीजफायर संकट
हमास पहले ही इजराइल पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगा चुका है और उसने भी इस समझौते को रद्द करने की धमकी दी थी। ट्रंप ने कहा कि वे इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी इस बारे में चर्चा करेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हमास को जल्द ही समझ में आ जाएगा कि वह क्या कहना चाहते हैं। ट्रंप की यह आक्रामक नीति इजराइल को खुली छूट देने का संकेत देती है।
गाजा पर कब्जे और विस्थापन की योजना
ट्रंप ने पहले भी गाजा पर कब्जा करने और वहां सिटी रिसॉर्ट बनाने की योजना का प्रस्ताव दिया था। उनका मानना है कि फिलिस्तीनी लोगों को गाजा से हटाकर जॉर्डन और मिस्र में बसाया जाना चाहिए। हालांकि, जॉर्डन और मिस्र ने इस योजना का विरोध किया है और इसे अस्वीकार्य बताया है। यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद को और गहरा सकता है।

जॉर्डन और मिस्र की मदद रोकने की धमकी
ट्रंप ने जॉर्डन और मिस्र को धमकी दी है कि यदि वे फिलिस्तीनी शरणार्थियों को अपने यहां बसाने से इनकार करते हैं, तो अमेरिका से मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद कर दी जाएगी। इस हफ्ते ट्रंप की जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय से मुलाकात होने वाली है, जिससे इस मुद्दे पर और तनाव बढ़ सकता है। उनका कहना है कि अमेरिका गाजा पर नियंत्रण के बाद फिलिस्तीनियों को वहां लौटने नहीं देगा, बल्कि उनके लिए स्थायी घर बनाए जाएंगे।
ट्रंप की गाजा पर नियंत्रण की योजना
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में गाजा को अमेरिकी झंडे के नीचे लाने और इसे ‘मिडिल ईस्ट का रिवेरा’ बनाने की अपनी योजना दोहराई है। ट्रंप का मानना है कि गाजा को रियल एस्टेट हब में बदला जा सकता है, जहां सुरक्षित समुदाय बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र सुंदर और मूल्यवान है, जिसे सही तरीके से विकसित करने के लिए बहुत अधिक धन की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति का इरादा केवल गाजा निवासियों के अस्थायी पुनर्वास का था, न कि इसे अमेरिका के अधीन लाने का।
अरब देशों की चिंताएं और विरोध
ट्रंप की इस योजना का जॉर्डन, मिस्र और अन्य अरब देशों ने कड़ा विरोध किया है। इन देशों का कहना है कि गाजा के फिलिस्तीनी नागरिकों को जबरन विस्थापित करना एक बड़ा मानवीय संकट पैदा कर सकता है। इसके अलावा, जॉर्डन और मिस्र को शरणार्थियों के आगमन से सुरक्षा संबंधी खतरे भी सता रहे हैं। इसी बीच, जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात करने पहुंचे हैं, जिससे इस मुद्दे पर आगे की चर्चाएं संभव हैं। इजरायल और हमास के बीच संघर्ष विराम के बावजूद, गाजा को लेकर भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।



