भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में शिव महापुराण कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि संघ और शिव के भाव में गहरी समानता है। उन्होंने कहा कि जैसे शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए विषपान किया, वैसे ही संघ भी प्रतिदिन आरोपों का विष पीकर संयम, सेवा और राष्ट्रहित में कार्य करता है। उन्होंने कहा कि जन्म किसी भी जाति में हुआ हो, लेकिन पहचान अंततः हिंदू, सनातनी और भारतीय की ही होती है। पंडित मिश्रा ने धर्मांतरण को समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए समाज को सतर्क रहने का आह्वान किया।

बैठक को संबोधित करते हुए संघ संचालक मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक सद्भाव कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज का मूल स्वभाव रहा है। समाज को चलाने और जोड़कर रखने का कार्य कानून नहीं, बल्कि सद्भावना करती है। उन्होंने कहा कि समाज शब्द का अर्थ ही समान गंतव्य की ओर बढ़ने वाला समूह है। विविधता के बावजूद एकता हमारी पहचान है। बाहरी रूप से भले ही हम अलग दिखें, लेकिन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर हम सभी एक हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि एक स्वभाव है, जो मत और पूजा पद्धति के आधार पर संघर्ष नहीं करता।

यह सामाजिक सद्भाव बैठक भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दो सत्रों में आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ हुई। बैठक में मध्यभारत प्रांत के 16 शासकीय जिलों से समाज के विभिन्न वर्गों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विभिन्न समाजों द्वारा अपने कार्यों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि समाज अपनी समस्याओं के समाधान के लिए स्वयं आगे आएगा और सरकार की प्रतीक्षा किए बिना सामूहिक प्रयास करेगा। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह बैठक किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज की है, जिसका उद्देश्य एक समाज, एक राष्ट्र के रूप में समाज को मजबूत बनाना है।


