छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पटवारी और उसके सहायक को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह रिश्वत 26 एकड़ कृषि भूमि के सीमांकन के बदले मांगी गई थी। शिकायत के आधार पर की गई इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रशासनिक विभाग में हड़कंप मच गया है। ACB ने बताया कि यह मामला पहले से ही निगरानी में था और प्लानिंग के तहत ट्रैप लगाकर आरोपियों को पकड़ा गया।

चार लाख में हुई थी डील, पहली किस्त में फंसे आरोपी
शिकायतकर्ता किसान वैभव सोनी ने बताया कि पटवारी सुशील जायसवाल और राजस्व निरीक्षक (RI) नरेश साहू ने पहले पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में सौदा चार लाख में तय हुआ। किसान ने इसकी सूचना ACB को दी, जिसके बाद निगरानी टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये पटवारी और उसके सहायक को सौंपे गए, ACB ने उन्हें मौके पर ही पकड़ लिया।
जांच के घेरे में RI, भ्रष्टाचार पर कसेगा शिकंजा
ACB अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में राजस्व निरीक्षक (RI) नरेश साहू की भूमिका भी संदिग्ध है। फिलहाल उसकी भूमिका की जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार अब भी व्याप्त है। ACB की इस कार्रवाई से आम जनता को उम्मीद जगी है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
शिकायत के बाद ACB ने रची साजिश
किसान विभाष सोनी ने पटवारी सुशील जायसवाल और आरआई नरेश साहू द्वारा पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगने की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से की थी। शिकायत दर्ज कराने से पहले किसान और पटवारी के बीच चार लाख रुपये में सौदा तय हो चुका था। सीमांकन कार्य शुरू करने के लिए पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये दिए जाने थे। जैसे ही पटवारी और उसका सहायक गुलाब दास मानिकपुरी रिश्वत की रकम लेने पहुंचे, ACB ने पहले से तैयार योजना के तहत उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। इस कार्रवाई से प्रशासन में हड़कंप मच गया है, और अब अन्य भ्रष्ट अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आरआई की भूमिका संदिग्ध, ACB कर रही जांच
गिरफ्तार पटवारी सुशील जायसवाल और उनके सहायक गुलाब दास मानिकपुरी को जेल भेज दिया गया है। वहीं, इस मामले में राजस्व निरीक्षक (RI) नरेश साहू की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। ACB इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और अगर आरआई की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग तेज हो गई है, जिससे आम नागरिकों को न्याय मिल सके और सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बनी रहे।



