सैफ अली खान की करोड़ों की संपत्ति को लेकर मामला बेहद पेचीदा हो गया है। भोपाल में उनकी नवाबी संपत्ति पर सरकार के दो अलग-अलग आदेश एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं, जिससे मामला उलझ गया है। इसमें ऐशबाग स्टेडियम, बरखेड़ी, रायसेन, इच्छावर और भोपाल की कई ऐतिहासिक इमारतें शामिल हैं, जो शत्रु संपत्ति के दायरे में आ रही हैं। कोर्ट के आदेश और संपत्ति पर स्टे हटने से सैफ की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब सवाल है कि क्या उनकी ये संपत्ति सरकार के कब्जे में जाएगी या फिर इसके लिए एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।

खान की संपत्तियों पर सरकार का कब्जा
जबलपुर हाईकोर्ट ने 13 दिसंबर 2024 को सैफ अली खान की शत्रु संपत्तियों पर लगी रोक हटा दी। कोर्ट ने 30 दिन की अपील की समय सीमा दी, जो 14 जनवरी 2025 को खत्म हो गई। अब सरकार इन संपत्तियों पर कानूनन कब्जा कर सकती है।
इनमें नूर-उस-सबह पैलेस, फ्लैग स्टॉफ हाउस और अहमदाबाद पैलेस शामिल हैं। फ्लैग स्टॉफ हाउस की मौजूदा कीमत 230 करोड़ रुपए है, जबकि नूर-उस-सबह पैलेस की कीमत लगभग 300 करोड़ रुपए है। जिला प्रशासन इस मामले में कानूनी राय ले रहा है, जिससे यह तय होगा कि सरकार कैसे इन संपत्तियों पर कब्जा करेगी।
शत्रु संपत्ति विवाद से हजारों परिवार होंगे प्रभावित
अगर केंद्र सरकार शत्रु संपत्ति कानून के तहत इन संपत्तियों पर कब्जा करती है, तो भोपाल में हजारों परिवार प्रभावित होंगे। करीब 1.5 लाख परिवार स्वामित्व के विवाद में फंस सकते हैं, और पांच लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस फैसले का असर झेलेंगे। शत्रु संपत्ति कार्यालय के नियमों के मुताबिक, इन संपत्तियों की अब खरीद-फरोख्त नहीं हो सकती।
भोपाल कलेक्टर इन संपत्तियों के कस्टोडियन हैं, लेकिन अंतिम निर्णय शत्रु संपत्ति कार्यालय ही करेगा। अगर सरकार जमीन पर कब्जा करती है, तो लोगों को यह जमीन छोड़नी होगी। फिलहाल मामला कानूनी दांवपेच में उलझा है, और इस पर लंबी लड़ाई चलने की संभावना है। नूर-उस-सबह पैलेस प्रबंधन ने भी अपनी संपत्ति पर दावा करते हुए मामले को चुनौती दी है।
सैफ की संपत्ति पर संकट , क्या हैं मामला…
भोपाल रियासत की ऐतिहासिक संपत्तियों पर 2015 से जो स्टे लगा हुआ था, उसे अब खत्म कर दिया गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सैफ अली खान, उनकी मां शर्मिला टैगोर, बहनें सोहा और सबा अली खान और फूफी सबीहा सुल्तान को इस मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था, लेकिन पटौदी परिवार ने तय समय में अपना पक्ष नहीं रखा। अब ड्यूरेशन खत्म हो चुका है और परिवार की ओर से कोई दावा नहीं किया गया है।
शत्रु संपत्ति एक्ट 1968 के तहत, बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए लोगों की छोड़ी गई संपत्तियों पर केंद्र सरकार का अधिकार होता है। स्टे हटने के बाद अब सरकार नवाब हमीदुल्लाह खान की संपत्ति को शत्रु संपत्ति कानून के तहत अपनी कस्टडी में ले सकती है। केंद्र सरकार ने 2015 में बताया था कि नवाब की संपत्ति की वैध वारिस उनकी बड़ी बेटी आबिदा थीं, जो पाकिस्तान चली गई थीं। इसलिए यह संपत्ति शत्रु संपत्ति अधिनियम के दायरे में आती है।



