दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुझाव दिया कि लड़ी वाले पटाखों पर प्रतिबंध जारी रखा जाए और पटाखे जलाने का समय रात 8 बजे से 10 बजे तक सीमित किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संकेत दिए कि दीवाली जैसे त्योहारों पर शर्तों के साथ ग्रीन पटाखों के उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने पर्यावरण संतुलन और लोगों की परंपराओं दोनों को ध्यान में रखते हुए इस मामले में जल्द फैसला सुनाने की बात कही है।
दिल्ली सरकार ने दी शर्तों के साथ अनुमति की सिफारिश
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली सरकार की ओर से सुझाव देते हुए कहा कि केवल NEERI और PESO द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखों को ही बेचने और जलाने की अनुमति दी जाए। उन्होंने लड़ी वाले पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध जारी रखने की सिफारिश की। साथ ही, दिल्ली सरकार ने सुझाव दिया कि दीपावली, गुरुपर्व और क्रिसमस जैसे अवसरों पर रात 8 से 10 बजे तक ही ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी जाए, ताकि परंपरा और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे।
CJI ने उठाया सवाल
सुप्रीम कोर्ट में पटाखों पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने पूछा कि 2018 से पटाखों पर रोक लगने के बाद क्या वाकई दिल्ली-NCR का AQI सुधरा है? सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रदूषण स्तर में कोई खास सुधार नहीं हुआ, सिवाय कोविड के दौरान, जब अन्य कारणों से हवा साफ हुई थी। कुछ वकीलों ने दलील दी कि पराली जलाने और वाहन प्रदूषण जैसे बड़े कारणों की अनदेखी कर सिर्फ पटाखों को दोष देना उचित नहीं है। तुषार मेहता ने मज़ाकिया लहजे में कहा कि बच्चों को पटाखे जलाने ले जाने में ही माता-पिता को एक घंटा लग जाता है, इसलिए त्योहारी रात पर समय सीमा नहीं रखी जानी चाहिए।
दूसरे राज्यों पर बैन को लेकर सवाल
पटाखा उत्पादकों के वकील ने दलील दी कि ग्रीन पटाखों का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के ही आदेश पर हुआ था, फिर उन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि सिर्फ NEERI और PESO द्वारा प्रमाणित 49 उत्पादकों को ही पटाखे बेचने की अनुमति दी जाए। वहीं, अन्य वकीलों ने सवाल उठाया कि दिल्ली की समस्या के कारण हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई शहरों में भी पटाखों पर रोक क्यों लगाई गई, जबकि इन राज्यों को इस मामले में सुना तक नहीं गया।


