प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड में BIMSTEC समिट के साइडलाइन पर बांग्लादेश के चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस से पहली बार मुलाकात की। यह बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि बांग्लादेश में अगस्त 2024 में हुए तख्तापलट के बाद यह दोनों नेताओं की पहली सीधी बातचीत थी। इससे एक दिन पहले दोनों नेता BIMSTEC डिनर में एक साथ देखे गए थे। इस मुलाकात की अटकलें पहले से थीं, जिन्हें अब औपचारिक रूप से पुष्टि मिल गई है। समिट में पीएम मोदी ने म्यांमार के सैन्य प्रमुख जनरल मिन आंग से भी मुलाकात की और हालिया भूकंप में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना जताई।
BIMSTEC: भारत और पड़ोसी देशों के बीच सहयोग का सेतु
BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) की शुरुआत 1997 में भारत और थाईलैंड की साझा पहल से हुई थी। इसका उद्देश्य दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को आपस में जोड़कर आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना था। ASEAN में भारत और उसके पड़ोसी देशों की भागीदारी न होने के चलते एक नए मंच की आवश्यकता महसूस हुई, जिसे BIMSTEC ने पूरा किया। आज यह संगठन भारत की ‘लुक ईस्ट’ और थाईलैंड की ‘लुक वेस्ट’ नीति का व्यावहारिक रूप है, जो भारत के कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूती देता है।

SAARC से दूरी, BIMSTEC की ओर बढ़ता भारत
2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने दक्षिण एशियाई देशों के साथ संबंध मजबूत करने के लिए SAARC मंच का रुख किया, लेकिन पाकिस्तान की अड़चनों ने भारत की क्षेत्रीय सहयोग की कोशिशों पर पानी फेर दिया। 2014 की काठमांडू समिट में पाकिस्तान ने मोटर व्हीकल और रेल एग्रीमेंट का विरोध किया और चीन के सिल्क रोड प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की वकालत की। इसके बाद 2016 में उरी हमले के बाद भारत ने SAARC समिट का बहिष्कार कर दिया, जिसके बाद SAARC व्यावहारिक रूप से निष्क्रिय हो गया। इस पृष्ठभूमि में भारत ने BIMSTEC को प्राथमिकता देना शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान सदस्य नहीं है।
BIMSTEC: भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का अहम स्तंभ
BIMSTEC बंगाल की खाड़ी से जुड़े सात देशों का संगठन है, जिसे भारत ने अपनी ‘लुक ईस्ट’ से ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी में अहम भूमिका दी है। भले ही नेपाल और भूटान तटीय देश न हों, लेकिन उनकी हाइड्रोपावर क्षमता और रणनीतिक स्थिति उन्हें इस मंच में शामिल करती है। भारत के लिए बंगाल की खाड़ी महत्त्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि यहीं से 80% समुद्री ऑयल ट्रेड और 40% ग्लोबल ट्रेड गुजरता है। दूसरी तरफ चीन BRI के माध्यम से क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। ऐसे में BIMSTEC भारत के लिए न सिर्फ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, बल्कि रणनीतिक संतुलन बनाए रखने का भी अहम जरिया बन चुका है।



