प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय थाईलैंड यात्रा भारत और थाईलैंड के मजबूत होते रिश्तों की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। उनकी यात्रा की शुरुआत बैंकॉक एयरपोर्ट पर भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात से हुई, जिससे प्रवासी भारतीयों में उत्साह देखने को मिला। इसके बाद उन्होंने थाईलैंड की सांस्कृतिक धरोहर ‘रामाकेन’ (थाई रामायण) का मंचन देखा, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने थाईलैंड की प्रधानमंत्री पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा के साथ व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर चर्चा की, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और सुदृढ़ होंगे।
BIMSTEC और बौद्ध विरासत का सम्मान
अपनी यात्रा के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी बहुपक्षीय सहयोग संगठन BIMSTEC सम्मेलन में भाग लेंगे, जिसमें दक्षिण एशियाई देशों के साथ व्यापार, सुरक्षा और विकास को लेकर गहन चर्चा होगी। इसके अलावा, वे बांग्लादेश के अंतरिम सरकार प्रमुख यूनुस खान से भी मुलाकात कर सकते हैं, जो दोनों देशों के बीच नए राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोर्न और रानी सुथिदा से भेंट भी शामिल है, जो राजनयिक संबंधों को और मजबूती देगी। साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी के ऐतिहासिक वात फो मंदिर के दौरे की संभावना भी है, जो भारत और थाईलैंड के बौद्ध सांस्कृतिक संबंधों को और गहरा करेगा।

भारत-थाईलैंड व्यापार और एक्ट ईस्ट पॉलिसी
भारत और थाईलैंड के बीच 2004 में अर्ली हार्वेस्ट स्कीम (EHS) समझौता हुआ था, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को मजबूती मिली। इस समझौते के तहत 83 उत्पादों को शामिल किया गया, जिन पर टैरिफ फ्री करने की सुविधा दी गई। भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, जिसे 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉन्च किया था, थाईलैंड को भारत की व्यापारिक और रणनीतिक योजनाओं में एक महत्वपूर्ण भागीदार बनाती है। इस नीति का उद्देश्य आसियान (ASEAN) और पूर्वी एशियाई देशों के साथ व्यापार, निवेश, सुरक्षा और सांस्कृतिक साझेदारी को बढ़ावा देना है।

पर्यटन और सुरक्षा सहयोग: भारत-थाईलैंड की साझेदारी
थाईलैंड भारतीय पर्यटकों के लिए तीसरी सबसे लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन बन गया है। 2024 में 21 लाख से अधिक भारतीयों ने थाईलैंड की यात्रा की, जो 2023 की तुलना में 30% अधिक है। दूसरी ओर, थाईलैंड से भारत आने वाले पर्यटकों में ज्यादातर बौद्ध धर्म से जुड़े तीर्थस्थलों का दौरा करते हैं। हालांकि, भारत और थाईलैंड के बीच गोल्डन ट्राएंगल क्षेत्र में ड्रग तस्करी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। यह क्षेत्र ड्रग्स, हथियारों और मानव तस्करी का केंद्र माना जाता है। दोनों देश सुरक्षा और खुफिया सहयोग को मजबूत कर इस समस्या का समाधान निकालने के प्रयास कर रहे हैं।



