सूडान के दारफुर क्षेत्र में अल फाशर शहर के इकलौते सुचारू रूप से चल रहे अस्पताल पर हुए ड्रोन हमले में कम से कम 70 लोगों की जान चली गई। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब अस्पताल में घायल और बीमार लोगों का इलाज किया जा रहा था। स्थानीय अधिकारियों ने इस अमानवीय कृत्य के लिए विद्रोही रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) को दोषी ठहराया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख ने हमले की पुष्टि करते हुए इसे इंसानियत पर बड़ा आघात बताया है।

गृहयुद्ध ने बिगाड़ी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
सूडान में जारी गृहयुद्ध ने पहले से ही कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं को तबाह कर दिया है। अल फाशर का यह अस्पताल युद्ध के बीच इलाके का एकमात्र ऐसा केंद्र था, जो अभी भी मरीजों की देखभाल कर रहा था। लेकिन अब इस हमले के बाद वहां स्वास्थ्य सेवाओं का पूरी तरह से संकट उत्पन्न हो गया है। अस्पताल पर हमला न केवल जानलेवा साबित हुआ, बल्कि इससे चिकित्सा सेवाओं में मौजूद आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई।
अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद जारी संघर्ष
सूडान में लंबे समय से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कई कदम उठाए हैं। प्रतिबंधों और शांति वार्ताओं के बावजूद, स्थिति लगातार बिगड़ रही है। RSF और जनरल अब्देल-फतह बुरहान के नेतृत्व वाली सेना के बीच लड़ाई ने आम नागरिकों के लिए जीवन कठिन बना दिया है। अल फाशर में हुए इस हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्यस्थता के प्रयास अभी तक सफल नहीं हुए हैं और सूडान की स्थिति को सुधारने के लिए अधिक ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

अस्पतालों पर हमले
WHO महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने सूडान के अल फाशर में सऊदी टीचिंग मैटरनल हॉस्पिटल पर हुए भयानक हमले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। इस हमले में 70 लोगों की मौत और 19 के घायल होने की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि यह हमला उस समय हुआ जब अस्पताल मरीजों से भरा हुआ था। इसके साथ ही, अल मल्हा में भी स्वास्थ्य सुविधा पर हमला हुआ, जिससे चिकित्सा सेवाओं को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
महानिदेशक ने स्वास्थ्य सेवाओं पर हो रहे इन अमानवीय हमलों को रोकने और क्षतिग्रस्त सुविधाओं की शीघ्र बहाली की अपील की है। उन्होंने सूडान के लिए शांति को सबसे बड़ी जरूरत और प्रभावी दवा बताया, जो इस संघर्षग्रस्त देश के लोगों के लिए राहत ला सकती है।
नागरिकों की सुरक्षा का संकट
सूडान के अल फाशर में हिंसा ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, 22 जनवरी से जारी लड़ाई में अकाल प्रभावित अबू शौक विस्थापन शिविर पर विद्रोही रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) द्वारा बार-बार तोपों से हमले किए जा रहे हैं। शुक्रवार की सुबह भारी गोलाबारी में आठ नागरिकों की मौत ने स्थिति को और भयावह बना दिया।
संयुक्त राष्ट्र और नागरिक समाज समूहों ने शिविरों में विस्थापित लोगों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से नागरिक आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता सेफ मैगांगो ने कहा कि अल फाशर के लोग महीनों से हिंसा और दुर्व्यवहारों का शिकार हो रहे हैं। साथ ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक ने अस्पताल पर हुए हमले में 70 लोगों की मौत की पुष्टि करते हुए हिंसा रोकने की आवश्यकता पर बल दिया है।



