सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू महाकुंभ में शामिल हुईं और संगम में तीन पवित्र डुबकियां लगाईं। उन्होंने मां गंगा को पुष्प अर्पित किए और मंत्रोच्चार के बीच गंगा पूजन एवं आरती की। इसके बाद उन्होंने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया और हनुमान मंदिर में दर्शन किए। उनके साथ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।
हेलीपैड से संगम तक विशेष सुरक्षा व्यवस्था
राष्ट्रपति का हेलिकॉप्टर सोमवार सुबह बमरौली एयरपोर्ट पर लैंड हुआ, जहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने उनका स्वागत किया। वहां से वे अरैल पहुंचीं और बोट के जरिए संगम स्नान के लिए रवाना हुईं। प्रयागराज में राष्ट्रपति की यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रहा, ताकि कोई अव्यवस्था न हो।
महाकुंभ में श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक भीड़
महाकुंभ के 29वें दिन अब तक 43.57 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। सिर्फ सोमवार को दोपहर 2 बजे तक 92.97 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। भारी भीड़ के कारण प्रशासन ने संगम स्टेशन को 14 फरवरी तक बंद कर दिया है, जबकि अरैल घाट से संगम तक बोट सेवाएं भी रोक दी गई हैं। प्रयागराज जंक्शन पर इमरजेंसी क्राउड मैनेजमेंट प्लान लागू किया गया है, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

राष्ट्रपति ने देखा डिजिटल महाकुंभ अनुभूति केंद्र
महाकुंभ में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डिजिटल महाकुंभ अनुभूति केंद्र का अवलोकन किया, जहां उन्हें आधुनिक तकनीकों के माध्यम से महाकुंभ के इतिहास, महत्व और आयोजन की विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहीं। सीएम योगी ने उन्हें केंद्र के उद्देश्यों और इसकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताया, जिससे श्रद्धालुओं को महाकुंभ के भव्य आयोजन की डिजिटल झलक मिल सके।
स्नान करने वालों की संख्या 50 करोड़ के करीब
महाकुंभ में श्रद्धालुओं की अपार आस्था के चलते स्नान करने वालों की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। रविवार की रात तक महाकुंभ में लगभग 44 करोड़ लोगों ने संगम में डुबकी लगाई। रविवार को ही दस लाख कप्लवासियों और 1.47 लाख पर्यटकों ने स्नान किया। शनिवार तक यह संख्या 42 करोड़ थी, जो तेजी से बढ़ रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि महाकुंभ के समापन तक स्नान करने वालों की संख्या 50 करोड़ के पार पहुंच सकती है, जो इसे अब तक का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बना देगा।



