मध्यप्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है, जिसमें प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को खास तवज्जो दी गई है। बजट में अगले 5 वर्षों में 1 लाख किलोमीटर सड़क निर्माण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। इसके अलावा, 500 रेलवे ओवर ब्रिज और फ्लाइओवर बनाए जाने की भी योजना है, जिससे यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सकेगा। इस बड़े कदम से प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा।
महिलाओं, किसानों और युवाओं को मिली सौगात
बजट में सिर्फ बुनियादी ढांचे ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। महिलाओं के सशक्तिकरण, किसानों की आर्थिक स्थिरता और युवाओं केरोजगार अवसरों को बढ़ाने के लिए कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। इन योजनाओं के जरिए सरकार प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रही है।
सड़कों के विकास से जुड़े महत्वाकांक्षी लक्ष्य
मध्यप्रदेश सरकार ने अपने बजट में सड़कों के विकास के लिए बड़े लक्ष्य तय किए हैं। अगले एक वर्ष में प्रदेश में 3500 किलोमीटर नई सड़कें और 70 पुल-ब्रिज बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ‘क्षतिग्रस्त पुलों का पुनर्निर्माण’ नामक नई योजना शुरू की जाएगी, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना ग्रामीण इलाकों में बेहतर परिवहन सुविधा प्रदान करने में कारगर साबित होगी।

मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना से गांवों को मिलेगा लाभ
गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए ‘मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना’ की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत उन ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें बनाई जाएंगी जहां अब तक संपर्क मार्ग उपलब्ध नहीं है। सरकार ने इस योजना के लिए भी 100 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। इससे प्रदेश के सुदूर गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी और ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सिंचाई परियोजनाओं से किसानों को राहत
प्रदेश के किसानों के लिए सिंचाई सुविधा को मजबूत करने के लिए 19 वृहद, मध्यम और 87 लघु सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इन योजनाओं से 7 लाख 2 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई संभव होगी। इन परियोजनाओं के निर्माण और रखरखाव के लिए 17,863 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। इन प्रयासों से प्रदेश के किसानों को फसल उत्पादन में बढ़ावा मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी।



