
मध्यप्रदेश राज्य तिलहन संघ से प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारियों को लंबे अरसे बाद अब न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इन कर्मचारियों को पांचवें वेतनमान के लाभ और नुकसान की भरपाई को लेकर न्याय मिलने की संभावना है। दरअसल, 8 जनवरी को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निज सचिव बेन्नी पी.एम. द्वारा दायर याचिका पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने कमिश्नर वाणिज्यिक कर को 4 हफ्ते में आदेश का पालन करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11-02-2025 को होगी।
कोर्ट ने क्या कहा
माननीय हाइकोर्ट की जबलपुर बेंच ने पिछली सुनवाई में प्रमुख सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग को वीसी के जरिए हाजिर रहने के निर्देश दिए थे। 8 जनवरी को इस मामले की सुनवाई में एस. धनराजू, कमिश्नर वाणिज्यिक कर, इंदौर हाइकोर्ट के समक्ष हाजिर हुए। एस. धनराजू की तरफ से माननीय हाइकोर्ट से 4 महीने का समय मांगा गया। मगर कोर्ट ने अपने आदेश में 4 सप्ताह में पांचवें वेतनमान का लाभ देने के आदेश का पालन करने के निर्देश दिए। साथ ही ऐसा नहीं होने पर कमिश्नर वाणिज्यिक कर को अगली सुनवाई में 11.02.2025 को पुनः हाजिर रहने के लिए कहा गया है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, बेन्नी पी.एम. की साल 1983 में मध्यप्रदेश राज्य तिलहन संघ में सुपरवाइजर के पद पर नियुक्ति हुई थी। मगर बाद में इस संघ के परिसमापन हो जाने के बाद उन्हें साल 2000 में समान्य प्रशासन विभाग में प्रतिनियुक्ति दे दी गई। 2000 से लेकर 2016 तक बेन्नी पी.एम. को अलग-अलग प्रतिनियुक्ति पर मध्यप्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्षों के साथ अटैच किया गया। इस दौरान उन्हें चौथे वेतनमान का लाभ मिल रहा था। वहीं साल 2016 में बेन्नी पी.एम. का तिलहन संघ से वाणिज्यिक कर विभाग में संविलियन कर लिया गया, जिससे वे सीधे चौथे वेतनमान से छठे वेतनमान में शामिल हो गए। ऐसे में 5वां वेतनमान ना मिलने से उन्हें प्रतिमाह लगभग 6000 रुपए का नुकसान झेलना पड़ा।
सेवानिवृत्त होने के बाद भी लड़ रहे हैं केस
बेन्नी पी.एम. ने पांचवा वेतनमान ना मिलने और उससे हुए नुकसान की भरपाई के लिए साल 2016 में हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसी बीच साल 2022 में वो सेवानिवृत्त हो गए। हालांकि संविदा नियुक्ति में वे फिलहाल मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निज सचिव का दायित्व संभाल रहे हैं। इस मामले पर बेन्नी पी.एम. का कहना है कि माननीय हाइकोर्ट के इस आदेश के बाद उम्मीद जगी है कि अब उन्हें पांचवें वेतनमान का लाभ मिल सकेगा। सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी थी और लगातार कोर्ट के माध्यम से लड़ाई लड़ रहे थे।


