
ख़बर मध्य प्रदेश से है जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिजामाता को लेकर बड़ी बातें कहीं हैं। उन्होंने जिजामाता को लेकर कहा है कि हमें उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। जिजामाता को सम्मान देने के मकसद से समारोह का आयोजन किया गया था। साथ ही, उन्होंने देश को गौरवान्वित करने वाले खिलाड़ियों की माताओं को जिजामाता सम्मान से भी नवाजा।
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित जिजामाता सम्मान समारोह में पहुंचे। वहां उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जिजामाता सम्मान समारोह महिला सशक्तिकरण और समाज में उनके योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से ही किया गया है। जिजामाता ने हमें यह सिखाया कि दृढ़ संकल्प और साहस के साथ असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। उन्होंने राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं और नीतियों का जिक्र करते हुए बताया कि महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
समारोह में क्रीड़ा भारती की ओर से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल स्पर्धाओं में देश को गौरवान्वित करने वाले खिलाड़ियों की माताओं को जिजामाता सम्मान से नवाजा गया। सम्मानित होने वालों में अंतर्राष्ट्रीय जिमनास्ट एवं खेल रत्न अवार्डी दीपा कर्माकर की माता गौरीदेवी, अंतर्राष्ट्रीय हॉकी गोलकीपर पी.आर. श्रीजेश की माता ऊषा कुमारी, ओलम्पिक मुक्केबाज लवलीना की माता ममोनी देवी बोरगोहेन, टोक्यो एवं पेरिस दोनों पैरालम्पिक में स्पर्धा में गोल्ड मेडल विजेता पैराशूटर अवनि लेखरा की माता श्वेता जेवरिया और प्रदेश के अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी विवेक सागर प्रसाद की माता कमला देवी को जिजामाता सम्मान से सम्मानित किया गया। बीते साल सम्पन्न हुई ओलम्पिक स्पर्धा में भाला फेंक में गोल्ड मेडल विनर नीरज चोपड़ा की माता सरोज चोपड़ा को भी इस सम्मान से नवाजा गया। उनकी अनुपस्थिति में उनकी ओर से नीरज चोपड़ा के चाचा भीमसिंह ने जिजामाता सम्मान ग्रहण किया। कार्यक्रम में ‘खेल-खिलाड़ी-खेल’ क्रीड़ा गीत की लॉचिंग भी की गई।
कार्यक्रम में क्रीड़ा भारती के दीपक संचेती, राज चौधरी, शैलेन्द्र श्रीवास्तव सहित इस संगठन के अन्य पदाधिकारी, बड़ी संख्या में खिलाड़ी, उनके परिजन तथा खेलप्रेमी दर्शकगण उपस्थित थे।
ये पुरस्कार भी दिए गए
समारोह में जिजामाता सम्मान पाने वाली श्वेता जेवरिया ने पैराशूटर अवनि लेखरा को उसका लक्ष्य प्राप्त करने के लिए किए गए अपने मातृरूपी कठिन परिश्रम के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि बच्चों को सदैव विपरीत हालातों से लड़ना सिखाएं, कभी उनका मनोबल गिरने न दें, तभी कोई बच्चा अच्छा खिलाड़ी बनने के लिए आगे बढ़ पाता है।
इसके अलावा, चेतन्य काश्यप फाउण्डेशन द्वारा बीते तीन सालों से हर साल राष्ट्रीय स्तर पर क्रीड़ा ज्ञान परीक्षा का ऑनलाईन आयोजन किया जा रहा है। साल 2024 में कुल 1 लाख 40 हजार प्रतिभागियों ने इस परीक्षा में भागीदारी की। फाउण्डेशन द्वारा इस परीक्षा के विजेताओं को हर साल 5 लाख रूपए की राशि से प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार दिए जाते हैं। प्रथम पुरस्कार एक लाख रूपए का और 50-50 हजार रूपए के दो द्वितीय और 11-11 हजार रूपए के 11 तृतीय पुरस्कार दिए जाते हैं। जिजामाता सम्मान समारोह में इस वर्ष का एक लाख रूपए का प्रथम पुरस्कार इंदौर मालवा प्रांत के पार्थ प्रजापत को और 50-50 हजार रूपए के दो द्वितीय पुरस्कार दक्षिण बिहार के अभिषेक कुमार और सौराष्ट्र के देव करेलिया को दिया गया। इस परीक्षा के आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं में खेलों के प्रति जागृति का संचार करना है।
क्या कहा सीएम यादव ने
सीएम यादव ने इस मौके पर कहा कि जब कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा में मेडल हासिल करता है, तो यह सिर्फ उस खिलाड़ी का परिश्रम ही नहीं होता बल्कि उस खिलाड़ी को तैयार करने में त्याग, बलिदान, समर्पण, साधना, भावना, अश्रु और परिश्रम की बूंदें बहाने वाली माता का भी अहम योगदान होता है। भारत को भारत बनाने में और खिलाड़ी को खिलाड़ी बनाने में नारी की भूमिका सर्वोपरि है। परिवार संतान की पहली प्रशिक्षण शाला होती है और माताएं यह काम बखूबी करती हैं। उनका सम्मान कर हम स्वयं गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। समाज और सरकार का खेल और खिलाड़ियों के प्रति सहयोगी दृष्टिकोण बेहद जरूरी है।
क्या कहा बाकी मेहमानों ने
केन्द्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि नारी शक्ति ने इस देश को सम्मान और अभिमान दिलाया है। खेल हमारे जीवन का अहम हिस्सा है। यह हमारी संस्कृति भी है और हमारी प्रकृति भी।
खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मान समारोह का भोपाल में आयोजन करने के लिए क्रीड़ा भारती को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल माताओं का सम्मान है बल्कि खेल और खिलाड़ियों को सम्मान देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का भी सम्मान है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि जिजामाता ने ही शिवाजी को छत्रपति शिवाजी महाराज बनाया। उनके नाम पर सम्मान समारोह आयोजित कर नारी शक्तियों को सम्मानित करना देश की हर उस माता के त्याग और बलिदान को सम्मान देना,जिन्होंने अपने परिश्रम से सींचकर देश को गौरवान्वित करने वाले खिलाड़ी तैयार किए।
इसके अलावा, क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि हमारे सीएम स्वयं कुश्ती के खिलाड़ी रहे हैं और खेलों के प्रति उनका प्रेम जगजाहिर है। खेल को एक संस्कार की तरह पोषित और पल्लवित करने का जो काम क्रीड़ा भारती कर रही है, हमारी सरकार भी इस दिशा में पूरा सहयोग करेगी।


