मिल्कीपुर, उत्तर प्रदेश ।
मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में तीसरी बार उपचुनाव होने जा रहा है जिसमें 26 वर्ष बाद दूसरी बार सपा-भाजपा आमने-सामने आई है। उपचुनाव के मैदान में सपा ने अजीत प्रसाद और भाजपा ने चंद्रभान पासवान को उतारा हैं। मिल्कीपुर में सबसे पहले 1998 में भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में उपचुनाव हुआ था।

पहले उपचुनाव में सपा ने रचा था इतिहास
1996 में समाजवादी पार्टी से मित्रसेन यादव मिल्कीपुर से विधायक चुने गए थे। और उनके निर्वाचित होने के बाद मिल्कीपुर विधानसभा सीट रिक्त हो गई थी। इसमें समाजवादी पार्टी से रामचंद्र यादव और भाजपा से पूर्व विधायक बृजभूषण त्रिपाठी प्रत्याशी थे।
सपा के सामने भगवा ‘चक्रव्यूह’ भेदने की चुनौती
मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव में सपा-भाजपा ने जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। और अलग-अलग जातियों के मतों को हासिल करने की रणनीति बनायी है। भाजपा ने ब्राह्मण मतों के लिए वरिष्ठ नेताओं को मोर्चे पर लगाया है, जबकि सपा ने सांसद अवधेश प्रसाद के पुत्र अजीत प्रसाद को प्रत्याशी बनाया है।
इस बार मुकाबला केवल जीत और हार का नहीं, बल्कि राजनीतिक दबदबा बनाने का भी है। सपा अपनी पुरानी जमीन बचाने की कोशिश में है, जबकि भाजपा अपनी जीत की लय को बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
परिवारवाद बनाम बाहरी का संग्राम
चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा गर्म हो चुका है। वहीं उम्मीदवारों के नामांकन के बाद चुनावी हुआ चुनावी रण दिलचस्प हो गया है। परिवारवाद और बाहरी के मुद्दे पर जमकर बहस हो रही है । जहां सपा ने भाजपा प्रत्याशी को बाहरी बताया है , वहीं भाजपा ने सपा के परिवारवाद का आरोप लगाया है। दोनों दलों के नेता और कार्यकर्ता चुनाव प्रचार में में पूरी ताकत लगा दी है। और जनसभाएं जनता के बीच खूब चर्चा बटोर रही हैं।

मिल्कीपुर में भाजपा का मेगा प्लान
मिल्कीपुर उपचुनाव को भाजपा ने प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया है। पार्टी ने 45 विधायकों को चुनाव प्रचार में उतारने का फैसला किया है। इन विधायकों को डोर-टू-डोर कैंपेनिंग का निर्देश दिया गया है, जिससे मतदाताओं तक सीधे पहुंच बनाई जा सके। भाजपा का यह कदम सपा के मजबूत जनाधार को चुनौती देने और हर वोटर तक पहुंचने की रणनीति का हिस्सा हैं। यह जानकारी पार्टी के प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने एक बैठक में दी। इस दौरान उन्होंने प्रभारी मंत्रियों के दायित्व भी नए सिरे से तय किए।
इस कारण हो रहा तीसरा उपचुनाव
2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर विधायक चुने गए अवधेश प्रसाद के 2024 के लोकसभा चुनाव में सांसद निर्वाचित हो जाने के कारण हो रहा है।
अवधेश प्रसाद ने सांसद चुने जाने के कुछ दिनों बाद ही विधायकी से इस्तीफा दे दिया था। तबसे मिल्कीपुर की सीट खाली थी। अब चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है, सीट पर लगातार बदलाव और राजनीतिक उथल-पुथल इसकी मुख्य वजह हैं, कांग्रेस व बसपा के मैदान में नहीं होने से लड़ाई , अब दो दलों के बीच ही मानी जा रही है।
Highlight
- 20 वर्ष बाद मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में हो रहा तीसरा उपचुनाव
- पहला उपचुनाव 1998 में और दूसरा 6 साल बाद 2004 में हुआ था
- जातिगत समीकरण को साधने में जुटे सियासी दल
- 50 हजार ब्राह्मण मतदाताओं के लिए विशिष्ट रणनीति
- सांसद पुत्र को टिकट देने पर भाजपा लगा रही परिवारवाद का आरोप
- भाजपा उम्मीदवार के बाहरी होने का मुद्दा बना रही समाजवादी पार्टी


