मणिपुर में पिछले 21 महीनों से जारी हिंसा के कारण मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा था। विपक्षी दलों के साथ-साथ खुद एनडीए गठबंधन के भीतर भी उनसे सवाल किए जा रहे थे। हालात को देखते हुए बीरेन सिंह ने इस्तीफे से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। अब भाजपा जल्द ही नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला ले सकती है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद मणिपुर में स्थिरता को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
कूकी समुदाय की अलग प्रशासन की मांग बरकरार
बीरेन सिंह के इस्तीफे से इतर, कूकी समुदाय की संस्था ITLF (इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम) ने साफ कर दिया है कि उनकी मांग अलग प्रशासन की ही रहेगी, चाहे मुख्यमंत्री कोई भी हो। ITLF के प्रवक्ता गिन्जा वूलजोंग का कहना है कि हाल ही में लीक हुए ऑडियो टेप के चलते बीरेन सिंह को पद छोड़ना पड़ा, लेकिन इससे उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा। कूकी समुदाय का आरोप है कि मैतेई समुदाय ने उन्हें अलग-थलग कर दिया है और अब वे पीछे नहीं हटेंगे। उनके अनुसार, मणिपुर में बहाए गए खून का समाधान सिर्फ एक राजनीतिक हल ही हो सकता है।

जातीय हिंसा के दबाव में बीरेन सिंह का इस्तीफा
मणिपुर में 21 महीनों से जारी जातीय हिंसा के बीच मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। 3 मई 2023 से शुरू हुई हिंसा में 250 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। इस दौरान कई बार शांति बहाली की कोशिशें की गईं, लेकिन कुकी और मैतेई समुदायों के बीच तनाव बना रहा। बीते महीने हिंसा में कमी जरूर आई थी, लेकिन विपक्ष लगातार मुख्यमंत्री पर सवाल उठा रहा था। खासकर सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई लीक ऑडियो क्लिप्स ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी थीं, जिसमें उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा था।
सुप्रीम कोर्ट में ऑडियो क्लिप ने बढ़ाई मुश्किलें
बीरेन सिंह के इस्तीफे की मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई ऑडियो क्लिप्स मानी जा रही है। कुकी संगठन KOHUR ने याचिका दाखिल कर इन क्लिप्स की जांच की मांग की थी। इसमें दावा किया गया कि मुख्यमंत्री ने कथित रूप से मैतेई समुदाय को हिंसा के लिए उकसाया और उन्हें बचाने की बात कही। कोर्ट ने मणिपुर सरकार को इस पर जवाब देने को कहा था, जिससे राजनीतिक संकट और गहरा गया। कांग्रेस पहले ही विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही थी, और बीरेन सिंह को अपनी ही पार्टी के विधायकों का समर्थन मिलने का भरोसा नहीं था।
अमित शाह से मुलाकात के बाद इस्तीफे का फैसला
बीरेन सिंह ने इस्तीफा देने से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान के दबाव और विपक्ष के बढ़ते हमलों के बीच उन्होंने पद छोड़ना ही बेहतर समझा। हालांकि, मणिपुर में हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। कूकी समुदाय अब भी अलग प्रशासन की मांग कर रहा है, जबकि मैतेई समुदाय के साथ उनका संघर्ष जारी है। आने वाले दिनों में भाजपा नए मुख्यमंत्री का ऐलान कर सकती है, लेकिन राज्य में स्थिरता लाने के लिए सख्त राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों की जरूरत होगी।



