दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुफ्त योजनाओं की घोषणा से राजनीति में हलचल मच गई है। आम आदमी पार्टी ने युवाओं के लिए ₹15,000 की वित्तीय सहायता, 6 महीने की पेड मैटरनिटी लीव, और केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा का वादा किया है, वहीं भाजपा और कांग्रेस ने भी अपनी योजनाएं घोषित की हैं। इन मुफ्त योजनाओं पर 25,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जो कि दिल्ली के वार्षिक बजट का 32% है। इन योजनाओं का खर्च जनता द्वारा दिए गए टैक्स से पूरा किया जाएगा। भाजपा ने दलित छात्रों, प्रतियोगी परीक्षा देने वालों, और अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए विशेष योजनाओं की घोषणा की है। इस ‘मुफ्त की रेवड़ी’ की होड़ ने यह सवाल उठाया है कि क्या यह सस्ती राजनीति ,लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकती है, या फिर यह केवल जनता को लुभाने के प्रयास हैं?

दिल्ली चुनाव में मुफ्त योजनाओं का दौर
दिल्ली विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों ने मुफ्त योजनाओं पर पूरी तरह से फोकस किया है, जबकि शहर के असली मुद्दे जैसे वायु प्रदूषण, यमुना प्रदूषण, खराब सड़कें, और कूड़े के पहाड़ नज़रअंदाज हो गए हैं। भाजपा, आप, और कांग्रेस ने चुनावी वादों में एक-दूसरे को पछाड़ते हुए मुफ्त शिक्षा, फ्री बिजली, महिला सम्मान योजनाएं जैसे लुभावने वादे किए हैं। इस चुनावी रेस में मुफ्त योजनाओं की होड़ ने दिल्ली के विकास के मुद्दों को पीछे धकेल दिया है। जनता भी मुफ्त सुविधाओं की मांग कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि दिल्ली का विकास आर्थिक दृष्टि से मजबूत होने के बावजूद अन्य देशों की तुलना में पीछे है।
दिल्ली में बढ़ती राजनीतिक चाल?
दिल्ली प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से तीसरे स्थान पर है, और यहां के लोग देश के सभी राज्यों के मुकाबले ज्यादा पैसेवाले हैं। 2023-24 में दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय लगभग 5 लाख रुपये है, जो राष्ट्रीय स्तर की आय से दोगुनी से भी अधिक है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मुफ्त योजनाएं दिल्लीवासियों के लिए जरूरी हैं या ये केवल चुनावी हथकंडे हैं। हालांकि, दिल्ली की बढ़ती समृद्धि और आय को देखते हुए, राजनीतिक दलों के द्वारा मुफ्त योजनाओं की घोषणाओं को एक सियासी चाल माना जा सकता है, जो चुनाव जीतने के लिए उठाए गए कदम हो सकते हैं।

Indian parliament in New Delhi
आप के मुफ्त वादों से गरमाया चुनावी माहौल…
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए, आम आदमी पार्टी ने महिलाओं, बुजुर्गों के लिए कई मुफ्त योजनाओं का वादा किया है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये और बाद में 2100 रुपये देगी। साथ ही, 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों का इलाज पूरी तरह मुफ्त किया जाएगा, चाहे वह सरकारी अस्पताल हो या प्राइवेट। आम आदमी पार्टी ने सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा, 20,000 लीटर मुफ्त पानी, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, और बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा की घोषणा की है।
इसके अलावा, बुजुर्गों के तीर्थाटन और पुजारियों तथा ग्रंथियों को हर महीने 18,000 रुपये वेतन देने का वादा भी किया है। पार्टी ने ऑटो चालकों के लिए 10 लाख रुपये का बीमा, बेटी की शादी में 1 लाख रुपये की सहायता और यूनिफॉर्म के लिए साल में दो बार 2500 रुपये देने की योजना बनाई है। इसके अलावा, डीटीसी बसों में स्टूडेंट्स के लिए मुफ्त यात्रा की घोषणा ने चुनावी हलकों में हलचल मचा दी है। इन वादों से दिल्ली में चुनावी माहौल गर्माया हुआ है और आम आदमी पार्टी अपनी सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।
चुनाव में रेवड़ी का मौसम : दिल्ली की सियासत में मुफ्त के वादों की होड़
दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस, आप, और भाजपा ने मुफ्त योजनाओं का ढेर लगाकर रेवड़ी राजनीति को अपनाया है। कांग्रेस ने महिलाओं को 2500 रुपये और बेरोजगारों को 8500 रुपये देने का वादा किया है, जबकि आप ने महिलाओं को मुफ्त यात्रा और बुजुर्गों के लिए मुफ्त इलाज की घोषणा की। वहीं, भाजपा भी मुफ्त बिजली-पानी की योजना का समर्थन कर रही है। कांग्रेस और आप की इन घोषणाओं को लोकतंत्र और विकास के लिए खतरे के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन केजरीवाल इसे सकारात्मक रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। “राजनीति की रेवड़ी”, “वोटों के लिए मुफ्त का खेल”, और “लोकतंत्र का खामियाजा”—ये कुछ मुहावरें हैं, जो इस चुनावी समर को बयान करते हैं।
वही अब बीजेपी ने भी महिलाओं के लिए 2500 रुपये महीना, बुजुर्गों के लिए 3000 रुपये तक पेंशन और 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देने का वादा किया है। साथ ही, सस्ते गैस सिलिंडर की योजना भी शामिल है। इस चुनावी माहौल में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी मुफ्त योजनाओं के वादों से पीछे नहीं हैं, जैसे 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली, सस्ता गैस सिलिंडर और 8500 रुपये बेरोजगारों के लिए। AAP ने महिला सम्मान योजना के तहत महिलाओं को 1000 रुपये की मासिक राशि का वादा किया है, जिसे बढ़ाकर 2100 रुपये करने का ऐलान किया। इस तरह, सभी दल मुफ्त सुविधाओं को लेकर होड़ में हैं।



