सीहोर के प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में जारी सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान तीन दिनों में तीन श्रद्धालुओं की मौत की खबर से माहौल चिंताजनक हो गया है। लाखों की संख्या में भक्त कथा सुनने और रुद्राक्ष प्राप्त करने पहुंच रहे हैं, जिससे प्रशासन की चुनौतियां बढ़ गई हैं। सोमवार सुबह गुजरात से आई 55 वर्षीय मंजू को अचेत अवस्था में पाया गया, जिन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इससे पहले शनिवार और रविवार को भी दो लोगों की मौत हो चुकी है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़, सुविधाओं पर सवाल
हर दिन करीब 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालु इस आयोजन में पहुंच रहे हैं, जिससे व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भीड़ के कारण स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन सेवाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। रविवार को जबलपुर से आए 25 वर्षीय गोलू कोष्टा की भी अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। प्रशासन और आयोजकों से श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की मांग की जा रही है।
समापन अवसर पर पहुंचे मुख्यमंत्री
सोमवार को इस महोत्सव का समापन दिवस था, जहां मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी पहुंचकर प्रसिद्ध कथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा की कथा सुनी। हालांकि, श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और लगातार हो रही मौतों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे आयोजन पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

भीषण गर्मी बनी श्रद्धालुओं की मौत की वजह
कुबेरेश्वर धाम में चल रहे सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान तेज गर्मी श्रद्धालुओं के लिए घातक साबित हो रही है। अत्यधिक भीड़ और उमस भरे माहौल के बीच कानपुर से आए विजेंद्र और जबलपुर के गोलू कोष्टा की मौत हो गई। विजेंद्र की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं, रविवार को जबलपुर से आए 25 वर्षीय श्रद्धालु गोलू कोष्टा भी तेज गर्मी की वजह से चक्कर खाकर गिर पड़े, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील की है और स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
सेवा समिति कराएगी हर दिन एक कन्या का विवाह
कुबेरेश्वर धाम में विठलेश सेवा समिति ने श्रद्धालुओं के लिए विशेष सेवा योजनाएं शुरू करने की घोषणा की है। समिति ने कहा है कि अब हर दिन एक कन्या का निशुल्क विवाह कराया जाएगा, जिससे साल भर में 365 लड़कियों की शादी संभव हो सकेगी। पं. प्रदीप मिश्रा ने इस पहल को धाम की सेवा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। इसके अलावा, महोत्सव के दौरान आने वाले भक्तों के लिए रोजाना 50 क्विंटल रोटियां, 40 क्विंटल खिचड़ी, 10 क्विंटल मीठी बूंदी और दही की ठंडाई का वितरण किया जा रहा है। इस आयोजन में शामिल होने के लिए अमेरिका से भी एक परिवार पहुंचा है, जो कथा समाप्त होने तक यहीं ठहरने की योजना बना रहा है।



