केजरीवाल-सिसोदिया ने शराब घोटाले में ईडी केस रद्द करने की मांग की, हाईकोर्ट ने सुनवाई 12 नवंबर तक टाली।

दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से जुड़े शराब घोटाले मामले की सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने ईडी द्वारा दर्ज केस को रद्द करने की अर्जी दी, यह दलील देते हुए कि मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं ली गई थी। हाईकोर्ट ने कुछ दलीलें सुनने के बाद सुनवाई 12 नवंबर तक टाल दी।
ईडी और आप की दलीलों में टकराव
ईडी के वकील एसवी राजू ने कहा कि मंजूरी ली गई थी और ट्रायल कोर्ट में पेश भी की गई। वहीं, आप की ओर से वकील रेबेका जॉन ने इसे खारिज करते हुए कहा कि मंजूरी का रिकॉर्ड हाईकोर्ट के सामने नहीं है। ईडी ने पहले सीबीआई की मंजूरी को आधार बताया, लेकिन फरवरी 2025 में नई अनुमति रिकॉर्ड पर रखी। कोर्ट ने बताया कि मंजूरी दिल्ली के एलजी से ली गई है।
ईडी की चार्जशीट और ट्रायल कोर्ट का संज्ञान
पिछले साल जुलाई में ईडी ने ट्रायल कोर्ट में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ 7वीं चार्जशीट दायर की। 9 जुलाई को ट्रायल कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा कि उनके खिलाफ केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। नवंबर में केजरीवाल ने हाईकोर्ट में इस आदेश को रद्द करने की मांग की, दलील दी कि आरोप लगने के समय वे मुख्यमंत्री थे और पब्लिक सर्वेंट पर केस चलाने के लिए मंजूरी जरूरी है, जो ईडी के पास नहीं थी। इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने कार्रवाई की।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और अनुमति की शर्त
हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट गए, जहां अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर को कहा कि पब्लिक सर्वेंट पर मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत केस चलाने के लिए सरकार की अनुमति अनिवार्य है। यह प्रावधान सीबीआई और राज्य पुलिस पर भी लागू होगा। इसके बाद ईडी ने केस के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल से अनुमति मांगी।


