वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 पर चर्चा पर ,संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक में हंगामे ने नया राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया। बैठक में असदुद्दीन ओवैसी, कल्याण बनर्जी समेत 10 विपक्षी सांसदों को हंगामे और असंसदीय व्यवहार के आरोप में निलंबित कर दिया गया। समिति की कार्यवाही में विवाद इतना बढ़ गया कि मार्शल को बुलाना पड़ा। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि उनकी आवाज दबाई जा रही है और उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है।
समिति की अंतिम रिपोर्ट से पहले बढ़ा तनाव
निलंबन के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहती है। वहीं, सत्तापक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष का व्यवहार संसदीय मर्यादा के विपरीत था। हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक ने भी संविधान का हवाला देते हुए विधेयक का विरोध किया और धार्मिक मामलों में सरकारी हस्तक्षेप को अस्वीकार्य बताया। इस घटनाक्रम ने वक्फ संशोधन विधेयक पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को और गहरा दिया है।

निलंबन पर विपक्ष का विरोध
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अपने निलंबन को लेकर समिति पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों पर जल्दबाजी में नियंत्रण करने की कोशिश हो रही है। मसूद ने यह भी दावा किया कि बैठक की तारीख बार-बार बदलने और उनकी मांगों को नजरअंदाज करने से समिति का माहौल असंवेदनशील और पक्षपाती हो गया है।
मीरवाइज उमर फारूक की नाराजगी
हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक ने वक्फ संशोधन विधेयक का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों को कमजोर करने का प्रयास बताया। मीरवाइज ने कहा कि समिति को विधेयक पर आगे बढ़ने से पहले कश्मीर की जनता की चिंताओं को समझना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
विधेयक पर विवाद बढ़ा
विपक्ष ने विधेयक पर पर्याप्त चर्चा का समय न दिए जाने पर हंगामा किया, जिससे समिति की बैठक बाधित रही। 27 जनवरी को प्रस्तावित अगली बैठक को स्थगित करने की मांग करते हुए विपक्ष ने सरकार पर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। इस गतिरोध ने वक्फ संशोधन विधेयक पर विवाद को और गहरा दिया है।

बीजेपी ने विपक्ष के आचरण को बताया ‘शर्मनाक’
भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने संसदीय समिति की बैठक के दौरान विपक्षी सांसदों के व्यवहार को शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने हंगामे और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे समिति की कार्यवाही बाधित हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि उन्हें मसौदा विधेयक में बदलावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। समिति 29 जनवरी को अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करने वाली है।
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने किया विधेयक का विरोध
हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक ने वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि धर्म के मामलों में सरकार का हस्तक्षेप अस्वीकार्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा और कोई ऐसा कदम नहीं उठाया जाएगा जिससे मुस्लिम समुदाय को शक्तिहीन होने का एहसास हो। उन्होंने विधेयक पर चर्चा से पहले जनता की चिंताओं को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।



