देश इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी से जनता त्रस्त है, लेकिन सरकार निजीकरण और संपत्तियों की बिक्री में ही लगी हुई है। लगभग हर प्रदेश 4 से 5 लाख करोड़ के कर्ज में डूबा हुआ है, जबकि देश पर कुल 270 लाख करोड़ का कर्ज है। ऐसे में बजट 2025 से आम जनता को राहत की उम्मीद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज सुबह 11 बजे संसद में बजट पेश करेंगी, जिससे महंगाई और टैक्स में बदलाव की संभावना है।
बजट में किसानों के मुद्दों को प्राथमिकता देने की मांग
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बजट पेश होने से पहले मीडिया से बातचीत में कहा कि किसानों की समस्याओं को इस बजट में गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से कर्जमाफी, एमएसपी गारंटी, और किसानों को वित्तीय सहायता देने की मांग की। उनका कहना है कि जब तक किसानों को स्थायी राहत नहीं मिलेगी, तब तक कृषि क्षेत्र संकट में ही रहेगा।
हर बजट के बाद जनता होती है निराश
जीतू पटवारी ने कहा कि पिछले बजटों से जनता को कोई ठोस राहत नहीं मिली है। हर बार सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और होती है। महंगाई बढ़ती जा रही है, पेट्रोल-डीजल के दामों में उछाल देखने को मिल सकता है, और आम आदमी की जेब पर लगातार बोझ बढ़ता जा रहा है। सरकार को इस बार बजट में गरीबों और किसानों के लिए ठोस नीतियां बनानी होंगी।

कृषि क्षेत्र के बिना मजबूत नहीं होगी अर्थव्यवस्था
पटवारी ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में देश की अर्थव्यवस्था को सुधारना चाहती है, तो उसे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ध्यान देना होगा। सिर्फ निजीकरण और सरकारी संपत्तियों की बिक्री से देश मजबूत नहीं होगा। बजट 2025 को किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए राहत देने वाला बनाया जाना चाहिए, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सके।
बढ़ती महंगाई और कर्ज में डूबता देश
देश की अर्थव्यवस्था लगातार गिरावट की ओर बढ़ रही है। महंगाई दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिससे आम जनता की परेशानियां बढ़ रही हैं। गरीबी, बेरोजगारी और कर्ज का बोझ हर प्रदेश में नजर आ रहा है। लगभग हर राज्य 4 से 5 लाख करोड़ के कर्ज में डूबा हुआ है, जबकि देश पर कुल 270 लाख करोड़ का कर्ज हो चुका है। छोटे उद्योगों का बुरा हाल है, वे लगातार बंद हो रहे हैं, लेकिन सरकार सिर्फ बड़े उद्योगपतियों का हित साधने में लगी हुई है।
सपने दिखाने की राजनीति, जमीनी हकीकत कुछ और
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में बड़े-बड़े सपने जरूर दिखाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। देश में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और भाजपा सरकार सिर्फ निजीकरण और सरकारी संपत्तियों को बेचने में लगी हुई है। समाज में आर्थिक असमानता बढ़ती जा रही है – गरीब और गरीब होते जा रहे हैं, जबकि अमीर और अमीर बनते जा रहे हैं। इतना ही नहीं, जो लोग अमीर हो चुके हैं, वे देश छोड़कर विदेशी नागरिकता ले रहे हैं, जिससे सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।



