जयपुर के SMS हॉस्पिटल ट्रॉमा सेंटर में लगी आग से 8 मरीजों की मौत के बाद सरकार ने 6 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई और नेताओं ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में रविवार देर रात दर्दनाक हादसा हुआ। ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो ICU में लगी आग में 8 मरीजों की मौत हो गई, जिनमें 3 महिलाएं भी शामिल हैं। हादसा रात करीब 11:20 बजे हुआ, जब स्टोर रूम से अचानक धुआं उठने लगा। वहां रखी मेडिकल फाइलें, उपकरण और ब्लड सैंपल ट्यूब्स जलने से आग तेजी से फैल गई और पूरे ICU को अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को वजह माना जा रहा है, हालांकि विद्युत विभाग और फायर सेफ्टी टीम जांच कर रही है।
अफरातफरी और राहत कार्य
आग लगते ही नर्सिंग स्टाफ और ड्यूटी डॉक्टरों ने अलार्म बजाया और मरीजों को निकालने की कोशिश शुरू की। ICU में उस समय कुल 24 मरीज भर्ती थे, जिनमें से 16 को सुरक्षित निकाल लिया गया। दमकल विभाग 10 मिनट में मौके पर पहुंचा और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। प्रशासन के अनुसार, अधिकतर मौतें धुएं से दम घुटने के कारण हुईं। हादसे के बाद अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गई और परिजन अस्पताल के बाहर इकट्ठा हो गए। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
6 सदस्यीय कमेटी गठित
राजस्थान सरकार ने SMS हॉस्पिटल हादसे की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय 6 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। इसमें चिकित्सा शिक्षा विभाग के शासन सचिव अम्बरीष कुमार की देखरेख में विभाग के आयुक्त इकबाल खान को अध्यक्ष बनाया गया है। अन्य सदस्यों में अस्पताल प्रशासन (राजमेस) के अतिरिक्त निदेशक मुकेश कुमार मीणा, राजमेस के मुख्य अभियंता चंदन सिंह मीणा, पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता (बिजली) अजय माथुर, SMS मेडिकल कॉलेज के अतिरिक्त प्रधानाचार्य डॉ. आरके जैन और नगर निगम के मुख्य अग्निशमन अधिकारी शामिल हैं। यह कमेटी आग लगने के कारण, बचाव व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम पर विस्तृत रिपोर्ट देगी।
नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार हर प्रभावित परिवार की मदद करेगी और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने हादसे को बेहद दुखद करार देते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और मृतकों के परिजनों को मुआवजा तथा घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। यह हादसा न केवल राज्य सरकार बल्कि पूरे देश में अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


