छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में अब पायलट बनने का सपना साकार करना आसान हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार को जशपुर में विमान उड़ान प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने 3 सीजी एयर स्क्वाड्रन एनसीसी रायपुर के कैडेट्स का उत्साहवर्धन किया और उन्हें हवाई प्रशिक्षण के महत्व के बारे में समझाया। सीएम ने माइक्रो लाइट एयर स्क्वाड्रन विमान की विशेषताओं की भी जानकारी ली, जिससे कैडेट्स को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा।

पर्यटन और प्रशिक्षण का अद्भुत संगम
सीएम साय ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे एनसीसी कैडेट्स को जशपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण करवाएं। इससे कैडेट्स को जिले के प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता के बारे में जानने का मौका मिलेगा। जशपुर की उन्नत कृषि प्रणाली, जिसमें काजू, चाय पत्ती, नाशपाती और सेब की खेती शामिल है, जिले के आर्थिक विकास को भी रफ्तार दे रही है। इस पहल से न केवल कैडेट्स को ज्ञानवर्धक अनुभव मिलेगा, बल्कि जशपुर को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान भी मिलेगी।
कैडेट्स का जोश और आत्मविश्वास चरम पर
7 मार्च 2025 से जशपुर में एनसीसी कैडेट्स को विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस दौरान कैडेट्स आकाश में विमान को उड़ाकर सफलतापूर्वक लैंडिंग करने का अभ्यास कर रहे हैं। इस प्रशिक्षण से कैडेट्स को व्यावहारिक अनुभव के साथ-साथ आत्मविश्वास भी मिल रहा है। जशपुर में इस ऐतिहासिक पहल के बाद स्थानीय युवाओं में पायलट बनने का उत्साह चरम पर है।

प्रशिक्षुओं का सपना हुआ साकार
जशपुर के विमान उड़ान प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे कैडेट्स के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। प्रशिक्षु नितेश प्रजापति ने कहा कि जशपुर का स्वच्छ और शांत वातावरण उनके प्रशिक्षण के लिए बेहद उपयुक्त है। नितेश का सपना एयरफोर्स पायलट बनने का है, और यह प्रशिक्षण उनके लिए उस दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं, प्रशिक्षु प्रांशु चौहान ने बताया कि जशपुर का एयर ट्रैफिक काफी साफ-सुथरा रहता है, जिससे उड़ान प्रशिक्षण बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक पूरा हो रहा है। प्राकृतिक सुंदरता के बीच प्रशिक्षण लेना उनके लिए एक यादगार अनुभव बन गया है।
आगडीह हवाई पट्टी की खासियत
आगडीह हवाई पट्टी, जहां यह प्रशिक्षण केंद्र संचालित हो रहा है, 1200 मीटर लंबी और 25 मीटर चौड़ी है। यहां कैडेट्स सिंगल इंजन ट्विन सीटर वायरस SW-80 विमान का प्रशिक्षण ले रहे हैं, जो अधिकतम 20,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। हालांकि, फिलहाल प्रशिक्षुओं के लिए 1,000 फीट की ऊंचाई पर ही अभ्यास कराया जा रहा है। इस सुव्यवस्थित हवाई पट्टी और उपयुक्त माहौल के कारण प्रशिक्षण बिना किसी रुकावट के सफलतापूर्वक चल रहा है।



