ISRO का ऐतिहासिक 100वां मिशन सफल
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने 100वें मिशन के तहत एक और उपलब्धि हासिल की है। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से बुधवार सुबह 6:23 बजे GSLV-F15 रॉकेट के जरिए NVS-02 नेविगेशन सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया गया। यह मिशन भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली को और सशक्त बनाएगा। लॉन्च के लगभग 20 मिनट बाद ही उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया गया, जिससे इसरो के वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गई।

नई चुनौतियों के साथ इसरो प्रमुख का पहला मिशन
यह मिशन इसरो के नए अध्यक्ष वी. नारायणन के नेतृत्व में पहला बड़ा अभियान था। उन्होंने 13 जनवरी 2025 को पदभार संभाला था और उनकी देखरेख में यह पहला सफल प्रक्षेपण रहा। लॉन्च से पहले उन्होंने तिरुपति मंदिर में पूजा-अर्चना कर इस मिशन की सफलता के लिए आशीर्वाद लिया। उनकी नेतृत्व क्षमता और इसरो वैज्ञानिकों की मेहनत के चलते यह ऐतिहासिक मिशन बिना किसी बाधा के पूरा किया गया।
भारत की नेविगेशन क्षमता को मिलेगा नया आयाम
NVS-02 उपग्रह को भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) का हिस्सा माना जा रहा है, जिसे NavIC के नाम से भी जाना जाता है। इस उपग्रह के प्रक्षेपण से भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली को मजबूती मिलेगी और यह अमेरिकी GPS का एक प्रभावी विकल्प बनेगा। इसका उपयोग सैन्य, वाणिज्यिक और नागरिक नेविगेशन सेवाओं के लिए किया जाएगा, जिससे भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को और मजबूती मिलेगी।

NVS-2: भारत की नेविगेशन प्रणाली को नई ताकत
इसरो के सूत्रों के अनुसार, NVS-2 उपग्रह के प्रक्षेपण की 27.30 घंटे की उल्टी गिनती मंगलवार तड़के 2:53 बजे शुरू हुई थी। बुधवार सुबह 6:23 बजे श्रीहरिकोटा से GSLV-F15 रॉकेट के जरिए इसे सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन (NavIC) प्रणाली का दूसरा उपग्रह है, जो भारत और इसके 1,500 किमी के आसपास के क्षेत्रों में सटीक पोजिशनिंग, गति और समय संबंधी सेवाएं प्रदान करेगा। इससे सैन्य और नागरिक उपयोग के लिए लोकेशन आधारित सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
सटीक नेविगेशन और IoT एप्लीकेशंस के लिए अहम मिशन
यूआर सैटेलाइट सेंटर द्वारा विकसित NVS-2 उपग्रह का वजन 2,250 किलोग्राम है। यह C-बैंड, L-1, L-5 और S-बैंड में काम करने वाले उन्नत नेविगेशन पेलोड से लैस है, जिससे जमीनी, हवाई और समुद्री नेविगेशन को सटीक बनाया जा सकेगा। यह उपग्रह कृषि डेटा संग्रह, वाहन ट्रैकिंग, मोबाइल लोकेशन सर्विसेज और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी उपयोगी साबित होगा। साथ ही, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित एप्लीकेशंस और उपग्रहों के कक्षा निर्धारण में भी इसका योगदान रहेगा, जिससे भारत की तकनीकी क्षमता और मजबूत होगी।
तिरुमला मंदिर में इसरो प्रमुख की विशेष प्रार्थना
ऐतिहासिक 100वें मिशन से पहले इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने तिरुमला मंदिर जाकर भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए और इसरो की सफलता के लिए प्रार्थना की। उन्होंने भगवान के चरणों में रॉकेट का एक मॉडल अर्पित किया और इस मिशन के लिए आशीर्वाद मांगा। इसके अलावा, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया, जिन्होंने इसरो के तीसरे लॉन्च पैड के लिए 400 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इससे भविष्य में भारी रॉकेटों के प्रक्षेपण को और आसान बनाया जा सकेगा , जिससे भारत की अंतरिक्ष उड़ान क्षमताएं और अधिक सशक्त होंगी।



