मथुरा के वृंदावन स्थित प्राचीन गोपीनाथ मंदिर में बुधवार को एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला, जब विधवा माताओं ने सदियों पुरानी रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ते हुए फूलों और गुलाल के रंगों से होली का जश्न मनाया। इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य समाज में प्रेम, समानता और एकता का संदेश देना था। होली के इस उल्लास में विदेशी महिलाएं भी शामिल हुईं और उन्होंने भी नृत्य व रंगों के साथ खुशियां बांटीं।
सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ने की पहल
इस आयोजन का श्रेय सामाजिक संस्था ‘सुलभ इंटरनेशनल’ को जाता है, जिसने विधवा माताओं को समाज में स्वीकृति और सम्मान दिलाने के उद्देश्य से यह पहल की। वर्षों से समाज में विधवाओं के लिए त्योहारों में भागीदारी को लेकर बनी रूढ़िवादी सोच के विपरीत, इस बार माताओं ने अपने हाथों में गुलाल और फूल लेकर पूरे हर्षोल्लास के साथ एक-दूसरे को रंग लगाया और आनंद मनाया।
गीत-संगीत और उल्लास से सजी होली
गोपीनाथ मंदिर में होली के गीतों की मधुर गूंज के बीच माताओं ने जमकर नृत्य किया और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की बधाई दी। महिला गीता दासी ने बताया कि इस अवसर पर सैकड़ों महिलाएं मौजूद रहीं, जिन्होंने प्रेम और खुशी के इस अनूठे पर्व का भरपूर आनंद लिया। इस आयोजन ने यह साबित किया कि समाज में बदलाव का रंग भी होली के रंगों की तरह ही गहरा और प्रभावशाली हो सकता है।

वृंदावन में विधवा माताओं की खुशियों भरी होली
गोपीनाथ मंदिर में आयोजित इस अनोखी होली में विधवा माताओं ने फूलों और गुलाल के साथ जमकर उत्सव मनाया। महिला रतनिया दासी ने इस अवसर पर कहा, “होली के पर्व में जो आनंद है, वो किसी में नहीं।” उन्होंने बताया कि हर साल यहां आयोजित इस होली में भाग लेने का अनुभव बेहद सुखद होता है। सामाजिक संस्था सुलभ इंटरनेशनल की पहल पर पिछले कई वर्षों से यहां यह आयोजन किया जा रहा है, जिससे विधवा माताओं को समाज में अपनापन और खुशियों के रंग महसूस करने का अवसर मिलता है।
सदियों पुरानी परंपरा को बदलने की प्रेरणादायक पहल
सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने 2013 में वृंदावन की विधवा माताओं को होली के उत्सव में भाग लेने के लिए प्रेरित किया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हर साल इस आयोजन को विशेष रूप से फूलों और गुलाल के साथ मनाया जाता है। बुधवार को सुबह से ही नगर के विभिन्न आश्रय सदनों से सैकड़ों माताएं गोपीनाथ मंदिर में एकत्र हुईं और प्रेमपूर्वक फूलों की पंखुड़ियों को तैयार किया। होली के भजन और रसिया गीतों की मधुर धुन पर माताओं ने नृत्य किया और भगवान श्रीराधाकृष्ण के साथ प्रेम और उल्लास का यह रंगीन पर्व धूमधाम से मनाया।



