प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास के माध्यम से गरीबी और बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं से लड़ सकता है। इसी उम्मीद के साथ उन्होंने प्रदेश में आए निवेशकों और उद्योगपतियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की अपनी एक विशिष्ट परंपरा और पहचान है, और यहां का हर नागरिक चाहता है कि औद्योगिक उन्नति के जरिए प्रदेश प्रगति करे। पटवारी ने स्पष्ट किया कि उचित निवेश सिर्फ एक अवसर नहीं, बल्कि अब प्रदेश की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है, जो राज्य के आर्थिक उत्थान में सहायक होगा।
प्रधानमंत्री का भाषण – अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा
पटवारी ने इन्वेस्टर समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर निराशा जताते हुए कहा कि प्रदेशवासियों को उनसे विशेष औद्योगिक पैकेज और ठोस नीतियों की अपेक्षा थी। लेकिन प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कोई नई योजना या संकल्प नहीं बताया। उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर समिट का उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देना होता है, लेकिन प्रधानमंत्री ने इसे सिर्फ कांग्रेस सरकारों की आलोचना का मंच बना दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा सरकार की पिछली इन्वेस्टर समिट्स में महज 3% निवेश ही क्यों आया? यह दर्शाता है कि सरकार की नीतियां निवेशकों को आकर्षित करने में असफल रही हैं।
भाजपा शासन में औद्योगिक क्षेत्रों की दुर्दशा
पटवारी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस सरकारों के समय मंडीदीप, गोविंदपुरा, मालनपुर और पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हुए, लेकिन भाजपा शासन में एक भी नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन निवेशकों ने भाजपा सरकार पर भरोसा कर लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग क्षेत्रों में 80 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया था, उनमें से 8 हजार करोड़ रुपये का भुगतान अभी तक बकाया है। इस कारण कई निवेशकों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि वे अपने घर तक बेचने को मजबूर हो गए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि निवेश को सिर्फ इवेंटबाजी का हिस्सा न बनाया जाए, बल्कि धरातल पर ठोस नीतियां लागू की जाएं।

कपास किसानों की अनदेखी पर पटवारी का सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मप्र को कपास की राजधानी” बताए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब कपास उत्पादक किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तक नहीं मिल पा रहा है, तब यह महज एक जुमला बनकर रह जाता है। मालवा-निमाड़ क्षेत्र के किसान लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें उनके हितों की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही हैं। पटवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री से उम्मीद थी कि वे किसानों के लिए विशेष पैकेज या कर राहत की घोषणा करेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
लेकिन सरकार ने निराश किया
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस सरकार की परंपरा रही है कि जब भी कोई नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाता था, तो वहां के उद्योगों को शुरुआती 5-7 साल तक कर-मुक्त रखा जाता था। इससे उद्योगों को बढ़ावा मिलता और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता। लेकिन प्रधानमंत्री और प्रदेश सरकार ने ऐसी कोई राहत देने की घोषणा नहीं की, जिससे उद्योगपतियों को कोई ठोस प्रोत्साहन नहीं मिला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गुजरात में बड़े उद्योगों को कई तरह की छूट दी जाती है, लेकिन मध्य प्रदेश को इस मामले में लगातार अनदेखा किया जा रहा है।
नर्मदा और बुनियादी ढांचे की उपेक्षा पर कांग्रेस का हमला
पटवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में नर्मदा नदी को प्रदेश की जीवनरेखा बताया, लेकिन उन्होंने नर्मदा घाटी में अवैध उत्खनन और बढ़ते प्रदूषण पर कोई बात नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के संरक्षण में नर्मदा के किनारे अवैध रेत खनन हो रहा है, जिससे जैव विविधता नष्ट हो रही है और 17 गंदे नाले लगातार नर्मदा को प्रदूषित कर रहे हैं। औद्योगीकरण के लिए रेलवे, वायुसेवा और राजमार्गों के उन्नयन की आवश्यकता पर भी प्रधानमंत्री ने कोई ठोस घोषणा नहीं की। पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री इन बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की कोई योजना बताएंगे, लेकिन वे सिर्फ पुराने आरोप दोहराकर चले गए, जिससे प्रदेश को केवल निराशा ही हाथ लगी।



