सुप्रीम कोर्ट ने मैनुअल स्कैवेंजिंग और मैनुअल सीवर सफाई पर बड़ा फैसला सुनाते हुए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। जस्टिस सुधांशु धूलिया और अरविंद कुमार की बेंच ने यह आदेश जारी करते हुए कहा कि यह अमानवीय प्रथा अब और नहीं चल सकती। कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दायर हलफनामे में स्पष्टता की कमी पर नाराजगी जताई और सरकार से यह बताने को कहा कि सीवर सफाई में मशीनों का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से कब और कैसे लागू किया जाएगा।
चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर्स को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इन छह महानगरों के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर्स (CEO) को निर्देश दिया है कि वे सटीक हलफनामा दायर करें, जिसमें स्पष्ट किया जाए कि मैनुअल सीवर सफाई और स्कैवेंजिंग को पूरी तरह से समाप्त करने की प्रक्रिया क्या होगी। अदालत ने इस रिपोर्ट के लिए 13 फरवरी की समय सीमा तय की है। कोर्ट के इस फैसले से उन सफाई कर्मियों को राहत मिलेगी, जिन्हें अब तक जान जोखिम में डालकर सीवर में उतरना पड़ता था। सरकार और प्रशासन के लिए यह आदेश एक सख्त चेतावनी भी है कि अब इस अमानवीय कार्य को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने फिर दिखाई सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने मैनुअल स्कैवेंजिंग और मैनुअल सीवर सफाई पर बड़ा फैसला लेते हुए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। अदालत ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि पहले भी इस अमानवीय प्रथा को खत्म करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ। कोर्ट ने केंद्र के हलफनामे को अधूरा और अस्पष्ट बताते हुए, साफ निर्देश दिए कि इन छह महानगरों में मैनुअल सफाई को तुरंत रोका जाए और मशीनों का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाए।
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. बलराम सिंह ने दायर की थी, जिसमें 1993 और 2013 के कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार आदेश जारी कर चुका है, लेकिन राज्य सरकारें और प्रशासन इसका सही से पालन नहीं कर रहे हैं। अदालत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश देने और इसकी निगरानी करने के लिए कहा था। लेकिन जब सरकार ने हलफनामा दाखिल किया, तो उसमें कई अहम जानकारियां नहीं थीं, जिससे अदालत असंतुष्ट रही।
केंद्र को पहले भी दिए गए थे निर्देश, फिर भी पालन अधूरा
सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर 2024 को केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे कि वह 20 अक्टूबर 2023 के आदेश के पालन की स्थिति स्पष्ट करे। इसके लिए केंद्रीय मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक बुलाने और सभी राज्यों के स्टेकहोल्डर्स से चर्चा कर रिपोर्ट पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था। केंद्र ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि देश के 775 जिलों में से 456 जिलों में अब हाथ से मैला ढोने का काम नहीं हो रहा है, लेकिन दिल्ली में अब तक इस आदेश का पालन नहीं हुआ। इसी को देखते हुए अदालत ने अब कड़ा कदम उठाया और छह महानगरों में मैनुअल सफाई पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया।



