दिल्ली के सीएम की रेस में विजेंद्र गुप्ता और रेखा गुप्ता सबसे आगे
दिल्ली में 20 फरवरी को होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। रामलीला मैदान में तीन मंच सज चुके हैं और 20 राज्यों के मुख्यमंत्री, उद्योगपति और सेलिब्रिटीज को न्योता भेजा गया है। आम जनता के लिए 20 हजार कुर्सियां लगाई गई हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दिल्ली का ताज किसके सिर सजेगा। बीजेपी विधायक दल की बैठक 19 फरवरी को तय करेगी कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
विजेंद्र गुप्ता: अनुभवी नेता और मजबूत दावेदार
विजेंद्र गुप्ता रोहिणी से लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए हैं और उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत मानी जाती है। उन्होंने 2015 और 2020 की आम आदमी पार्टी की लहर के बावजूद जीत दर्ज की थी। विजेंद्र गुप्ता 2015 से 2020 तक दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे और छात्र राजनीति से लेकर विधानसभा तक लंबा अनुभव रखते हैं। उनका संगठनात्मक कौशल और जनता के बीच लोकप्रियता उन्हें सीएम पद की रेस में एक मजबूत दावेदार बनाती है।
रेखा गुप्ता: महिला नेतृत्व और संघ की पसंद
रेखा गुप्ता शालीमार बाग से पहली बार विधायक बनी हैं, लेकिन दिल्ली की राजनीति में उनकी पकड़ गहरी है। वह दो बार पार्षद रह चुकी हैं और आरएसएस की सक्रिय सदस्य हैं। रेखा गुप्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ की अध्यक्ष और सचिव रह चुकी हैं। महिला चेहरा और संघ का समर्थन उन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में एक ताकतवर दावेदार बनाता है।
दिल्ली की जनता किसके सिर सजाएगी ताज?
बीजेपी ने दिल्ली में 48 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर फैसला बाकी है। विजेंद्र गुप्ता का अनुभव और रेखा गुप्ता का संघ कनेक्शन पार्टी को दुविधा में डाल रहा है। पार्टी के लिए यह चुनाव सिर्फ चेहरा चुनने का नहीं, बल्कि आने वाले निकाय चुनाव और लोकसभा चुनाव की रणनीति का हिस्सा भी है। अब सबकी नजरें 19 फरवरी की विधायक दल की बैठक पर टिकी हैं।
सीएम रेस में नया ट्विस्ट: भाटिया और महावर ने बढ़ाई टेंशन
दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की रेस में अब नया मोड़ आ गया है। विजेंद्र गुप्ता और रेखा गुप्ता के बीच टक्कर के बीच बीजेपी ने आखिरी समय में सस्पेंस बढ़ा दिया है। अब रेस में दो नए पुराने नाम फिर से लौट आए हैं—राजकुमार भाटिया और अजय महावर। भाटिया आदर्श नगर से पहली बार विधायक बने हैं और दिल्ली बीजेपी के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं, अजय महावर घोंडा सीट से लगातार दूसरी बार जीते हैं और पिछली विधानसभा में बीजेपी के चीफ व्हिप रह चुके हैं। दोनों नेता युवा और संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं, जिससे बीजेपी के लिए एक नया सियासी संदेश देने का मौका बन रहा है।
बीजेपी की सस्पेंस पॉलिटिक्स और आप में भी अनिश्चितता
बीजेपी की रणनीति हमेशा अंतिम समय में चौंकाने की रही है, इसलिए एक बार फिर भाटिया और महावर का नाम रेस में आना कोई संयोग नहीं है। पार्टी का फोकस महिला वोटरों को साधने के साथ-साथ युवा और नए चेहरों को सामने लाने पर भी है। दिलचस्प बात ये है कि जहां बीजेपी अपने सीएम चेहरे पर उलझी हुई है, वहीं आम आदमी पार्टी भी कन्फ्यूज दिख रही है। आप ने अब तक यह तय नहीं किया कि नेता प्रतिपक्ष आतिशी होंगी या कोई और। सोमवार की बैठक के बाद भी पार्टी की ओर से गोल-मोल जवाब ही सामने आया। अब दिल्ली की जनता दोनों दलों की रणनीतिक चालों का इंतजार कर रही है।




