महाकुंभ का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है, लेकिन आज़ाद भारत में इसका पहला आयोजन 1954 में हुआ था। उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने दो से तीन बार कुंभ क्षेत्र का दौरा किया था, जो किसी भी मुख्यमंत्री की ओर से मेले का निरीक्षण करने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण था। उनके बाद किसी भी मुख्यमंत्री ने महाकुंभ में इतनी बार भाग नहीं लिया। योगी आदित्यनाथ ने इस परंपरा को एक नए स्तर पर पहुंचाते हुए 2025 के महाकुंभ में 12 बार मेले का दौरा किया, जो अब तक किसी भी मुख्यमंत्री द्वारा की गई सबसे अधिक यात्राएं हैं।
महाकुंभ में ऐतिहासिक भागीदारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी यात्राओं के दौरान न केवल मेले की तैयारियों का निरीक्षण किया, बल्कि संगम तट पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा भी लिया। उन्होंने पैदल भ्रमण कर प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनकी यह ऐतिहासिक भागीदारी महाकुंभ की भव्यता को और अधिक समृद्ध करने वाली साबित हुई है। इससे पहले किसी भी मुख्यमंत्री ने इतनी बार मेले का दौरा नहीं किया था, जिससे योगी आदित्यनाथ ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
महाकुंभ में योगी आदित्यनाथ की अभूतपूर्व सक्रियता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ 2025 की भव्यता और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अब तक 18 बार मेला क्षेत्र का दौरा किया है। उनके ये दौरे सिर्फ प्रशासनिक औपचारिकताएं नहीं बल्कि श्रद्धालुओं और संत समाज से सीधा संवाद स्थापित करने का एक प्रयास भी रहे हैं। 09 जनवरी से लेकर 22 फरवरी तक, उन्होंने अलग-अलग अवसरों पर अखाड़ों, संत समाज, सरकारी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों से मुलाकात की। संगम में स्नान, सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा और धार्मिक आयोजनों में सहभागिता के माध्यम से योगी आदित्यनाथ ने अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया।

महाकुंभ में वैश्विक उपस्थिति और उच्चस्तरीय आगमन
महाकुंभ के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गृह मंत्री अमित शाह, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जैसे शीर्ष नेताओं का आगमन हुआ। इन सभी महत्वपूर्ण दौरों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वागत किया और महाकुंभ के महत्व को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने में भूमिका निभाई। उन्होंने 73 देशों के राजनयिकों से संवाद कर भारत की सांस्कृतिक विरासत और इस दिव्य आयोजन की महत्ता को वैश्विक स्तर पर रेखांकित किया। इसके अलावा, बौद्ध महाकुंभ, जलवायु सम्मेलन और डिजिटल महाकुंभ जैसे विशेष आयोजनों में भी उनकी भागीदारी रही।
संतों और श्रद्धालुओं से संवाद, व्यवस्थाओं का सतत निरीक्षण
योगी आदित्यनाथ न केवल संत समाज से मुलाकात कर उनकी आवश्यकताओं को समझ रहे हैं, बल्कि आम श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर भी सतत रूप से समीक्षा कर रहे हैं। 22 फरवरी को उन्होंने महाशिवरात्रि की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक की, जबकि उनके आगामी दौरे में वे सतुआ बाबा के शिविर और श्रीकांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती से भेंट करेंगे। लगातार हो रहे ये दौरे यह दर्शाते हैं कि मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से हर व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं, ताकि महाकुंभ 2025 को ऐतिहासिक और भव्य बनाया जा सके।



