मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्था देखने को मिली, जिससे बीजेपी नेताओं ने नाराजगी जाहिर की। श्योपुर जिले के नेताओं ने पार्क प्रबंधन पर लापरवाही और अनदेखी के आरोप लगाए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नामीबिया से आए पांच चीतों को बाड़े से मुक्त कर जंगल में छोड़ दिया, लेकिन इस आयोजन में प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के कारण कई अतिथि असंतुष्ट दिखे। बीजेपी नेताओं का कहना है कि अधिकारियों ने उनकी अनदेखी की और कार्यक्रम में समुचित व्यवस्थाएं नहीं की गईं।
चीतों को मिली आजादी, लेकिन कार्यक्रम पर उठे सवाल
कार्यक्रम के दौरान सीएम मोहन यादव ने दो मादा चीता, आशा और वीरा, तथा आशा के तीन शावकों को जंगल में छोड़ा। यह क्षण वन्यजीव संरक्षण के लिए ऐतिहासिक था, लेकिन इसी दौरान प्रशासन की खामियां भी उजागर हुईं। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्क प्रशासन ने उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया और कार्यक्रम की रूपरेखा को सही तरीके से नहीं संभाला। इस मामले को लेकर कूनो प्रबंधक पर सवाल खड़े किए गए हैं और इसकी जांच की मांग भी की गई है।
बीजेपी नेताओं की उपेक्षा से बढ़ा विवाद
कूनो नेशनल पार्क में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम के दौरान बीजेपी नेताओं को नजरअंदाज किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी सांसद शिवमंगल सिंह तोमर, जिला पंचायत अध्यक्ष गुड्डी बाई और जिलाध्यक्ष शशांक भूषण सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्क के अधिकारी सिर्फ मुख्यमंत्री की आवभगत में लगे रहे और जनप्रतिनिधियों को तवज्जो तक नहीं दी। इस उपेक्षा से नाराज नेताओं ने इसे प्रशासन की लापरवाही करार दिया और कूनो प्रबंधन पर सवाल उठाए।

बीजेपी नेताओं ने जताया विरोध, अफसरों से हुई तीखी बहस
कार्यक्रम में शामिल बीजेपी नेताओं ने कूनो के डीएफओ आर. थिरिकुलर और सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा पर जनप्रतिनिधियों का अपमान करने का आरोप लगाया। नाराज नेताओं ने अफसरों को खरी-खोटी सुनाई और व्यवस्था को लेकर गहरी असंतुष्टि जताई। इस दौरान नेताओं और अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। बीजेपी जिलाध्यक्ष शशांक भूषण ने कहा कि जब जनप्रतिनिधियों को बुलाया गया था, तो उनके साथ उचित सम्मान और समुचित व्यवस्थाएं होनी चाहिए थीं।
कूनो के अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आए
इस विवाद के बाद जब मीडिया ने कूनो के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, तो वे इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आए। अधिकारियों ने सवालों से किनारा किया और चुप्पी साधे रखी। इस घटना के बाद बीजेपी नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे इस मुद्दे को पार्टी स्तर पर उठाएंगे और आवश्यक कार्रवाई की मांग करेंगे। वहीं, यह विवाद आगे और तूल पकड़ सकता है क्योंकि जनप्रतिनिधियों के अपमान का आरोप सीधे प्रशासन पर लगाया गया है।



