भोपाल के 90 डिग्री मोड़ वाले ब्रिज मामले में सीएम मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई करते हुए 8 इंजीनियरों को बर्खास्त और एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया।एक रिटायर्ड एसई पर जांच के आदेश, ब्रिज का लोकार्पण सुधार कार्यों के बाद ही होगा।

भोपाल के ऐशबाग में बने 90 डिग्री कोण वाले रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। देशभर में आलोचना का कारण बने इस ब्रिज के मामले में पीडब्ल्यूडी के सात इंजीनियरों को निलंबित किया गया है, जिनमें दो मुख्य अभियंता भी शामिल हैं। इसके साथ ही, सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री एमपी सिंह को भी दोषी पाया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी।
निर्माण एजेंसी और डिज़ाइन फर्म ब्लैकलिस्ट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस कार्रवाई की जानकारी साझा करते हुए बताया कि ब्रिज निर्माण में लापरवाही बरतने वाली एजेंसी मेसर्स पुनीत चड्ढा और डिज़ाइन सलाहकार मेसर्स डायनमिक कंसल्टेंट को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। ब्रिज में सुधार के लिए एक कमेटी बनाई गई है और अब इसका लोकार्पण सुधार कार्यों के पूरा होने के बाद ही किया जाएगा। दोषी इंजीनियरों पर कार्रवाई के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जा रहा है।
रेलवे और पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से बना विवादित ब्रिज
भोपाल के ऐशबाग आरओबी को लेकर रेलवे और लोक निर्माण विभाग (PWD) के बीच लंबे समय तक कागजी खेल चलता रहा। 2022 से लेकर ब्रिज बनने तक दोनों विभाग निरीक्षण करते रहे, लेकिन 90 डिग्री का खतरनाक मोड़ किसी की नजर में नहीं आया। जहां गोल (सर्कुलर) पियर बनने चाहिए थे, वहां दीवार जैसी संरचना बना दी गई। इस लापरवाही की वजह से देशभर में आलोचना हुई और अंततः जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की गई।
डिजाइन में भ्रम, पत्राचार में देर
ब्रिज का निर्माण 2018 में स्वीकृत हुआ और 2022 में शुरू हुआ। शुरुआती निरीक्षण में 45 डिग्री कोण पर सहमति बनी थी, लेकिन बाद में रेलवे ने आपत्ति जताई। निर्माण रेलवे की ज़मीन पर हो रहा था, इसलिए अंतिम स्वीकृति भी उसी की थी। सितंबर 2020 में नई डिजाइन बनी जिसमें मेट्रो रेल के हिसाब से सर्कुलर पियर तय हुए और मेट्रो से अनापत्ति भी ली गई। लेकिन अप्रैल-मई 2023 में रेलवे को खामी भरी डिजाइन पर पत्र लिखा गया, फिर भी उसने बदलाव नहीं किया। अब रेलवे समन्वय के लिए भी एक समिति बनाई गई है जो सुरक्षा और तकनीकी पहलुओं को देखेगी।


