कनाडा के नए प्रधानमंत्री के रूप में मार्क कार्नी शुक्रवार, 14 मार्च को शपथ लेंगे। भारतीय समयानुसार यह कार्यक्रम रात 8:30 बजे राजधानी ओटावा के रिड्यू हॉल के बॉलरूम में आयोजित होगा। कार्नी के साथ उनके मंत्रिमंडल के सदस्य भी शपथ लेंगे। 9 फरवरी को लिबरल पार्टी के नेता चुने जाने के बाद कार्नी को 85.9% वोट मिले, जिससे उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की।
जस्टिन ट्रूडो से सत्ता का हस्तांतरण
मार्क कार्नी मौजूदा प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का स्थान लेंगे। ट्रूडो ने जनवरी में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे की घोषणा की थी और शुक्रवार को आधिकारिक रूप से गवर्नर जनरल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। पार्टी नेता का चुनाव जीतने के बाद कार्नी और ट्रूडो के बीच सत्ता हस्तांतरण को लेकर चर्चा हुई थी।

बैंकर से प्रधानमंत्री तक का सफर
मार्क कार्नी एक अनुभवी अर्थशास्त्री और बैंकर हैं। 2008 में वे बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर बने थे, जहां उनके कुशल नेतृत्व ने कनाडा को आर्थिक मंदी से उबरने में मदद की। उनकी इस सफलता के चलते 2013 में उन्हें बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर का प्रस्ताव मिला। बैंक ऑफ इंग्लैंड के 300 साल के इतिहास में वे पहले गैर-ब्रिटिश नागरिक थे, जिन्होंने यह पद संभाला। ब्रेग्जिट के दौरान उनके फैसले उन्हें ब्रिटेन में एक लोकप्रिय व्यक्तित्व बना गए।
ट्रम्प के विरोधी लेकिन बयानबाजी से बचते हैं कार्नी
मार्क कार्नी लिबरल पार्टी में डोनाल्ड ट्रम्प के विरोधी माने जाते हैं, लेकिन वे उनके खिलाफ खुलकर बयान देने से बचते रहे हैं। कार्नी का मानना है कि कनाडा की मौजूदा स्थिति के लिए ट्रम्प की धमकियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने हाल ही में एक बहस के दौरान कहा कि देश में पहले ही हालात खराब थे, जिसे ट्रम्प की नीतियों ने और बिगाड़ दिया। हालांकि, अमेरिका द्वारा कनाडा पर 25% टैरिफ लगाने के ऐलान के बाद कार्नी ने स्पष्ट रूप से कहा, “कनाडा किसी दबंग के आगे नहीं झुकेगा। हमें चुप नहीं बैठना चाहिए और अपने कामगारों के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी।”

लोकप्रियता में तेजी से बढ़त हासिल की
हालांकि मार्क कार्नी शुरुआत में ज्यादा चर्चित नहीं थे, लेकिन अपनी रणनीति और लिबरल पार्टी के समर्थन से उन्होंने लोकप्रियता हासिल की। पिछले साल जुलाई में हुए एक सर्वे में केवल 7% लोग ही कार्नी को पहचानते थे, लेकिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद उन्होंने अपनी स्थिति मजबूत की। लिबरल पार्टी के कई कैबिनेट मंत्रियों और सांसदों का समर्थन मिलने के बाद कार्नी की दावेदारी और मजबूत हो गई। हाल ही में हुए मेनस्ट्रीट सर्वे के मुताबिक, कार्नी को 43% और उनके प्रतिद्वंदी क्रिस्टिया फ्रीलैंड को 31% वोटर्स का समर्थन मिला है।
प्रधानमंत्री का कार्यकाल सीमित रहने की आशंका
हालांकि प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने में सफल रहे कार्नी का कार्यकाल लंबा चलेगा या नहीं, इसे लेकर संशय बना हुआ है। लिबरल पार्टी के पास संसद में बहुमत नहीं है, जिससे कार्नी को अक्टूबर से पहले चुनाव कराने होंगे। दिलचस्प बात यह है कि फिलहाल वे संसद के भी सदस्य नहीं हैं, ऐसे में चुनाव जल्द कराने की संभावना जताई जा रही है।



