शाह का निशाना- विपक्ष जेल से सत्ता चलाना चाहता है, राहुल ने पहले अध्यादेश फाड़कर नैतिकता की बात की थी, अब सुर बदल लिए।

गृहमंत्री अमित शाह ने संविधान (130वां संशोधन) विधेयक पर विपक्ष के विरोध को गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि क्या कोई मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या मंत्री जेल से सरकार चला सकता है। शाह ने स्पष्ट किया कि विपक्ष चाहता है कि उन्हें जेल में रहते हुए भी सत्ता संभालने का विकल्प मिले, जबकि लोकतंत्र में यह व्यवस्था उचित नहीं है।
संशोधन विधेयक पर बयान
शाह ने कहा कि अगर कोई प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री जेल जाए तो शासन कैसे चलेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे हालात में पार्टी का कोई अन्य नेता सरकार चलाए, और जमानत मिलने के बाद आरोपी फिर पद संभाल सकता है। केंद्र ने 20 अगस्त को यह विधेयक लोकसभा में पेश किया है, जिसमें 30 दिन की गिरफ्तारी या हिरासत की स्थिति में पद छोड़ना अनिवार्य किया गया है। विपक्ष इसका कड़ा विरोध कर रहा है।
विधेयक पर शाह का पक्ष
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि संविधान (130वां संशोधन) विधेयक सिर्फ विपक्ष पर नहीं बल्कि एनडीए के मुख्यमंत्रियों और नेताओं पर भी लागू होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर किसी पर झूठा मामला दर्ज होता है तो अदालतें आंख मूंदकर नहीं बैठीं, जमानत मिल सकती है। शाह ने विपक्ष पर राजनीति को नैतिकता से दूर ले जाने का आरोप लगाया और कहा कि पहले नेता जेल जाने या आरोप लगने पर इस्तीफा दे देते थे, लेकिन अब जेल में रहते हुए भी पद पर बने रहने की नई परंपरा शुरू हो गई है।
राहुल और शाह के पुराने किस्से
शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पूछा कि लालू यादव को बचाने वाला अध्यादेश राहुल गांधी ने क्यों फाड़ा था। उन्होंने तंज कसा कि अगर उस समय नैतिकता थी तो आज क्यों नहीं। साथ ही अपने अनुभव का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि उन पर आरोप लगते ही उन्होंने CBI समन के दूसरे दिन इस्तीफा दे दिया था। गिरफ्तारी के बाद भी उन्होंने पद की जिम्मेदारी नहीं ली और बाद में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। शाह ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।


