अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर जा रहे BSF के 1200 जवानों को रेलवे ने खस्ताहाल ट्रेन उपलब्ध कराई, जिसे देख जवानों ने सफ़र से इनकार कर दिया। मामला सामने आने के बाद रेल मंत्री ने संज्ञान लेते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया।
अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर जा रहे बीएसएफ के 1200 जवानों को रेलवे ने इतनी खस्ताहाल ट्रेन दी कि जवानों ने उसमें चढ़ने से इनकार कर दिया। ट्रेन की हालत देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसे वर्षों से इस्तेमाल ही नहीं किया गया हो—दरवाजे, खिड़कियां, लाइट्स और टॉयलेट तक सबकुछ बदहाल था। जवानों ने जब अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इस स्थिति से अवगत कराया, तब मामला सामने आया। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संज्ञान लेते हुए अलीपुरद्वार मंडल के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया और नया रैक मुहैया कराया गया।
रेलवे पर उठे सवाल
बीएसएफ के ये वही जवान हैं जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अद्भुत वीरता दिखाई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह खुद इन जवानों की सराहना कर चुके हैं। जम्मू फ्रंटियर के इन वीरों ने अकेले 118 से अधिक पाकिस्तानी पोस्ट तबाह की थीं। ऐसे बहादुर जवानों को अमरनाथ यात्रा जैसी संवेदनशील ड्यूटी पर भेजने के लिए जर्जर ट्रेन देना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक गंभीर अपमान भी है। यह मामला न सिर्फ रेलवे की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि देश के रक्षक जवानों के सम्मान और सुविधा को लेकर हमारी प्राथमिकताओं पर भी विचार मांगता है।
जवानों के लिए मांगी गई थी स्पेशल ट्रेन
अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर जा रहे बीएसएफ के 1200 जवानों के लिए गुवाहाटी फ्रंटियर से एनएफ रेलवे मालेगांव (असम) से एक स्पेशल ट्रेन की मांग की गई थी। त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल के विभिन्न स्टेशनों से जवानों को सवार होना था, जिसमें एसी, स्लीपर और जनरल कोच समेत पूरी सुविधाओं वाली ट्रेन की मांग की गई थी। लेकिन जब बीएसएफ अधिकारियों ने ट्रेन का निरीक्षण किया, तो वे हैरान रह गए—खिड़कियों और दरवाजों में छेद, टूटी हुई सीटें, गंदगी, बिजली का अभाव और टॉयलेट की हालत अमानवीय थी। ट्रेन का महीनों से उपयोग नहीं हुआ था और उसमें सैकड़ों कॉकरोच घूम रहे थे।
नई व्यवस्था से ड्यूटी में देरी
जवानों की सुरक्षा और सम्मान को देखते हुए बीएसएफ ने इस ट्रेन को खारिज कर दिया और रेलवे को कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। ट्रेन को छह जून को रवाना होना था, लेकिन इसकी स्थिति को लेकर बीएसएफ के आला अधिकारियों ने साफ कर दिया कि यह ड्यूटी पर जा रहे जवानों के लिए उपयुक्त नहीं है। रेलवे ने ट्रेन रद्द कर दी और चार दिन बाद यानी मंगलवार को दूसरी ट्रेन उपलब्ध कराई। हालांकि, इस देरी के कारण बीएसएफ जवानों की कश्मीर में तैनाती की समयसीमा भी प्रभावित हुई, जो पहले 12 जून निर्धारित थी। मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि जवानों की प्राथमिकता को लेकर सिस्टम की उदासीनता भी उजागर करता है।


