अमेरिकी सेना ने 13 मार्च को इराक के अल-अनबर इलाके में एयरस्ट्राइक कर ISIS लीडर अबू खदीजा को ढेर कर दिया। इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने इराकी सेना के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया। इस हमले में अबू खदीजा के साथ एक अन्य आतंकी भी मारा गया। दोनों आतंकी आत्मघाती जैकेट पहने हुए थे, लेकिन विस्फोट नहीं हो पाया।
हमले के बाद अमेरिकी सेना और इराकी सेना ने मौके पर पहुंचकर दोनों आतंकियों के शव बरामद किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड फोर्स ने पुष्टि की कि अबू खदीजा की पहचान डीएनए जांच के जरिए की गई। ये डीएनए सैंपल पहले किए गए एक ऑपरेशन में एकत्र किया गया था, जिसमें अबू खदीजा भागने में सफल हो गया था।
कौन था अबू खदीजा?
अबदल्ला मक्की मुस्लिह अल-रिफई उर्फ अबू खदीजा का जन्म 1991 में हुआ था। 2009 में उसने अल-कायदा के साथ जुड़कर आतंक के रास्ते पर कदम रखा। हालांकि, दो साल बाद उसे गिरफ्तार कर इराक की जेल में डाल दिया गया। 2011 में वह जेल से भाग निकला और फिर से आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय हो गया।

ISIS के उदय के साथ बढ़ा अबू खदीजा का कद
2014 में जब सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट (ISIS) का प्रभाव बढ़ रहा था, तब अबू खदीजा ने संगठन का हिस्सा बनकर अपनी गतिविधियां शुरू कीं। उसके कार्यों और नेतृत्व क्षमता के चलते उसे इराक और सीरिया में ISIS का चीफ बना दिया गया। हालांकि, उसे कब चीफ बनाया गया, इसकी सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। बाद में उसे उप-खलीफा का दर्जा भी दिया गया, जिससे उसकी संगठन में स्थिति और मजबूत हो गई।
वैश्विक स्तर पर आतंक फैलाने की भूमिका
अबू खदीजा ने ISIS का वैश्विक ऑपरेशन चलाने में प्रमुख भूमिका निभाई। अबू बकर अल-बगदादी के मारे जाने के बाद 2019 में खदीजा को ISIS का मुखिया बना दिया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, वह पूरे संगठन में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति था और दुनियाभर में ISIS के ऑपरेशंस, हथियारों की आपूर्ति और हमलों की योजना में उसकी अहम भूमिका थी। इसके अलावा, संगठन के लिए फंड जुटाने की जिम्मेदारी भी खदीजा के पास थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति और इराकी प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अबू खदीजा की मौत पर कहा कि यह ऑपरेशन उनके बहादुर सैनिकों द्वारा किया गया, जिन्होंने निडर होकर इस आतंकी का खात्मा किया। इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल सुदानी ने भी खदीजा के मारे जाने पर राहत जताते हुए कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलता है। इराक में अब भी 2,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो ISIS के बचे हुए लड़ाकों के खिलाफ अभियान में सहयोग कर रहे हैं।



