मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे को पीथमपुर के रामकी इंसीनरेटर में जलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले 24 घंटों में 3,240 किलोग्राम कचरा जलाया गया, जिसे लाइम के साथ इंसीनेटर में डाला गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रारंभिक जांच में उत्सर्जन को मानकों के अनुरूप पाया गया, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों की चिंता बरकरार है।
ग्रामीणों को महसूस हुई दुर्गंध, विरोध में महिलाएं उतरीं सड़क पर
कचरा जलाने के पहले दिन तारपुराऔर चिराखान गांवों में स्थिति सामान्य रही, लेकिन शाम होते ही कुछ ग्रामीणों ने तेज दुर्गंध और काले धुएं की शिकायत की। इससे स्वास्थ्य पर संभावित असर को लेकर लोगों में डर का माहौल बन गया। महिलाओं ने विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया और प्रशासन से इस प्रक्रिया को रोकने की मांग की।
प्रदूषण नियंत्रण पर आश्वासन, लेकिन सवाल बरकरार
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दावा किया कि इंसीनेटर से निकलने वाले धुएं की मॉनिटरिंग की जा रही है और यह मानकों के अंदर है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जहरीले कचरे का जलाया जाना उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन से जवाब मांगा है, जिससे आने वाले दिनों में विरोध तेज हो सकता है।

डीजल की भारी खपत, प्रदूषण नियंत्रण पर निगरानी जारी
भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे के निपटान में बड़ी मात्रा में ईंधन की खपत हो रही है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के क्षेत्रीय अधिकारी एसएन द्विवेदी ने बताया कि हर घंटे 135 किलोग्राम कचरा और समान मात्रा में लाइम इंसीनेटर में डाला जा रहा है। पहले दिन ही 21,000 लीटर डीजल की खपत हुई। हालांकि, चिमनी से निकलने वाले धुएं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है और उत्सर्जन अभी तक मानक सीमा के भीतर पाया गया है। बावजूद इसके, स्थानीय लोगों में इस प्रक्रिया को लेकर चिंता बनी हुई है।
विरोध तेज, महिलाओं पर केस दर्ज
पीथमपुर में विरोध अब उग्र होता जा रहा है। शनिवार को कई महिलाओं ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया और पीथमपुर गौरव दिवस का बहिष्कार किया। इस विरोध के कारण केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर और धार विधायक नीना वर्मा ने कार्यक्रम में शामिल होने से दूरी बना ली, जबकि नगर पालिका के कई पार्षदों ने भी विरोध के चलते कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। देर शाम बिना अनुमति धरना देने के आरोप में पुलिस ने पांच महिलाओं पर केस दर्ज कर लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा, क्योंकि वे अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।



