दिल्ली विधानसभा की नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को पत्र लिखकर AAP विधायकों के निलंबन पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी विधायकों को सदन में प्रवेश न देना लोकतंत्र की हत्या के समान है। जय भीम के नारे लगाने पर AAP विधायकों को बाहर कर दिया गया, जबकि भाजपा के विधायक मोदी-मोदी के नारे लगाते रहे और उन्हें रोका नहीं गया।
राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा
इससे पहले, आतिशी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर तत्काल मिलने का समय मांगा था। उन्होंने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि विपक्ष को सदन में अपनी बात रखने से रोका जा रहा है, जो संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। आतिशी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन बताते हुए निष्पक्षता की मांग की।
विधानसभा सत्र में हंगामा और निलंबन
दिल्ली विधानसभा के सत्र के पहले दिन से ही सदन में भारी हंगामा देखने को मिला। दूसरे दिन विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने AAP के 22 में से 21 विधायकों को तीन दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया। यह निलंबन एलजी के अभिभाषण के दौरान आप विधायकों के विरोध प्रदर्शन को नियमों का उल्लंघन मानते हुए किया गया। इस निलंबन को लेकर आम आदमी पार्टी लगातार विरोध जता रही है और इसे असंवैधानिक करार दे रही है।

विधानसभा परिसर में AAP विधायकों का प्रवेश रोका
दिल्ली विधानसभा के 21 AAP विधायकों को निलंबन के बाद विधानसभा परिसर में भी प्रवेश करने से रोक दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के आदेश पर पुलिस ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर बैरिकेडिंग लगा दी, जिससे विधायकों को बाहर ही रोक दिया गया। आम आदमी पार्टी ने इसे संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया और भाजपा पर लोकतंत्र का गला घोंटने का आरोप लगाया। पूरे दिन AAP विधायकों ने विधानसभा के बाहर धरना-प्रदर्शन किया, जबकि केवल अमानतुल्लाह खान ही सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सके।
राष्ट्रपति को पत्र लिखने का कारण
आतिशी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बीजेपी सरकार ने सरकारी दफ्तरों से संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर और शहीद भगत सिंह की तस्वीरें हटा दी हैं। यह न केवल इन महापुरुषों का अपमान है, बल्कि दलित, पिछड़े और वंचित समाज की भावनाओं पर भी हमला है। इस मुद्दे को सदन में उठाने के प्रयास पर विपक्ष की आवाज दबाने के लिए AAP विधायकों को सदन से निष्कासित कर दिया गया।
विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश
आतिशी ने अपने पत्र में लिखा कि अगर विपक्ष को इस तरह चुप कराया जाएगा, तो जनता के मुद्दे कौन उठाएगा? लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन मौजूदा हालात में सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। AAP विधायक इस मामले को लेकर राष्ट्रपति से मिलने की मांग कर रहे हैं ताकि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जा सकें। उन्होंने इसे तानाशाही करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ AAP पर नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र पर हमला है।



