महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रयागराज में 45 दिनों तक चला महाकुंभ अपने समापन की ओर पहुंचा। 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इसे एक ऐतिहासिक आयोजन बना दिया। संगम तट पर साधु-संतों, भक्तों और श्रद्धालुओं ने स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। मां गंगा, यमुना और सरस्वती के दिव्य तटों पर अनवरत श्रद्धा की धारा बहती रही।
स्वच्छता के प्रति संकल्प
महाकुंभ के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं झाड़ू उठाकर संगम तट पर सफाई अभियान चलाया। उनके साथ दोनों उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद रहे। गंगा से कचरा निकालकर स्वच्छता का संदेश दिया गया। साथ ही सफाईकर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की गई।
प्रधानमंत्री मोदी का भावुक संदेश
महाकुंभ के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एकता का महाकुंभ – युग परिवर्तन की आहट’ शीर्षक से एक भावनात्मक ब्लॉग लिखा। उन्होंने मां गंगा, यमुना और सरस्वती से प्रार्थना करते हुए कहा कि यदि किसी भी सेवा में कोई कमी रह गई हो, तो वे क्षमा करें। उनके इस संदेश ने श्रद्धालुओं के हृदय को छू लिया और देशभर में चर्चा का विषय बन गया।

समापन के बाद भी बनी रहेगी आस्था की लहर
महाकुंभ का औपचारिक समापन होने के बावजूद संगम नगरी में श्रद्धालुओं का प्रवाह अब भी जारी है। मंदिरों में पूजा-पाठ, संतों के प्रवचन और आध्यात्मिक अनुष्ठान निरंतर हो रहे हैं। प्रयागराज की पवित्र भूमि पर आस्था की यह अद्भुत लहर अगले महाकुंभ तक यूं ही बनी रहने की उम्मीद है।
भक्तों का महासागर, अद्वितीय रिकॉर्ड
महाशिवरात्रि के दिन महाकुंभ के अंतिम शाही स्नान में 1.53 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई, जिससे पूरे आयोजन के दौरान कुल स्नान करने वालों की संख्या 66 करोड़ तक पहुंच गई। यह आंकड़ा न केवल अमेरिका की कुल जनसंख्या से दोगुना है, बल्कि दुनिया के 193 देशों की जनसंख्या से भी अधिक है। यह महाकुंभ हिंदू संस्कृति की वैश्विक शक्ति और सनातन धर्म के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा का प्रमाण बना।
पीएम मोदी का भावनात्मक संदेश और योगी सरकार की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिव्य आयोजन को ‘एकता का महायज्ञ’ बताते हुए कहा कि जब कोई राष्ट्र अपनी गुलामी की मानसिकता को त्याग कर नवचैतन्य से भर जाता है, तो ऐसा ही दृश्य उपस्थित होता है, जैसा महाकुंभ में देखा गया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में शासन, प्रशासन और जनसहयोग से यह महाकुंभ सफल बना। मोदी ने इसे सत्ता और प्रशासन से ऊपर उठकर समर्पित सेवाभाव का आयोजन बताया, जहां हर व्यक्ति श्रद्धालु और सेवक की भूमिका में था।



