प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप’ (SOUL) की स्थापना को भारत के विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। भारत मंडपम में आयोजित इस लीडरशिप कॉन्क्लेव के पहले संस्करण का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीय विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में जुटे हैं। ऐसे में हर क्षेत्र में श्रेष्ठ नेतृत्व की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। इस कार्यक्रम में भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे की मौजूदगी ने भी इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बना दिया।
राष्ट्र निर्माण के लिए नागरिकों का विकास आवश्यक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ आयोजन ऐसे होते हैं जो दिल के बहुत करीब होते हैं, और यह कार्यक्रम भी उन्हीं में से एक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सशक्त राष्ट्र का निर्माण सशक्त नागरिकों से ही संभव है। व्यक्ति के विकास से ही समाज और फिर संपूर्ण राष्ट्र का विकास होता है। ‘जन से जगत’ की इस यात्रा में नेतृत्व की गुणवत्ता को निखारना समय की मांग है। इसलिए यह नया संस्थान भविष्य के लीडर्स को प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप – भविष्य की नींव
प्रधानमंत्री ने ‘स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप’ की स्थापना को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह संस्थान आने वाली पीढ़ियों को श्रेष्ठ नेतृत्व के लिए तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि चाहे राजनीति हो, व्यापार हो, विज्ञान हो या सामाजिक क्षेत्र, हर क्षेत्र में ऐसे लीडर्स की जरूरत है जो न केवल देश को आगे ले जाएं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत का नाम रोशन करें। इस पहल से युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी और वे खुद को एक सक्षम नेतृत्व के रूप में विकसित कर पाएंगे।

स्वामी विवेकानंद का विजन और नेतृत्व की आवश्यकता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को याद करते हुए कहा कि वे केवल भारत को गुलामी से मुक्त ही नहीं कराना चाहते थे, बल्कि उसे एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित करना चाहते थे। उनका विश्वास था कि अगर उनके पास 100 समर्पित और योग्य लीडर्स हों, तो वे भारत को दुनिया का सबसे ताकतवर देश बना सकते हैं। यही विचार आज भी प्रासंगिक है, जहां हर क्षेत्र में हमें प्रभावी नेतृत्व की आवश्यकता है।
वैश्विक स्तर पर भारत का प्रभाव बढ़ाने का संकल्प
पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत 21वीं सदी में अपनी पहचान एक वैश्विक शक्ति के रूप में बना रहा है। इसके लिए हर सेक्टर में मजबूत नेतृत्व की जरूरत है, चाहे वह कूटनीति हो, तकनीक हो या व्यापार। अगर सही नेतृत्व के साथ हम आगे बढ़ें तो भारत का प्रभाव वैश्विक स्तर पर कई गुना बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि हमें ‘ग्लोबल विजन’ के साथ ‘लोकल वैल्यूज़’ को बनाए रखते हुए आगे बढ़ना होगा, ताकि भारत का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।
स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप से नए नेतृत्व का निर्माण
भारत मंडपम में आयोजित इस सम्मेलन में भूटान के प्रधानमंत्री दासो शेरिंग तोग्बे ने मुख्य भाषण दिया और नेतृत्व विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। दो दिवसीय इस सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां अपने अनुभव साझा करेंगी, जिससे नए और उभरते हुए लीडर्स को सीखने का अवसर मिलेगा। यह पहल न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ने में मदद करेगी, जिससे आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन मिलेगा और देश को नए ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकेगा।



