दिल्ली में मुख्यमंत्री पद को लेकर बना सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से रेखा गुप्ता के नाम को मंजूरी दी गई। आज दोपहर 12.35 बजे उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाएंगे। इसके साथ ही उनका मंत्रिमंडल भी शपथ ग्रहण करेगा। रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।
विधायक दल की बैठक में मुहर
भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली स्थित कार्यालय में हुई बैठक में रेखा गुप्ता को विधायक दल का नेता चुना गया। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद थे। बैठक के दौरान प्रवेश वर्मा, सतीश उपाध्याय और विजेंद्र गुप्ता ने रेखा गुप्ता के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे नौ अन्य विधायकों ने अनुमोदित किया। इस फैसले के बाद बीजेपी के नेताओं का एक दल राजभवन गया, जहां उन्होंने उपराज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया।

चौथी महिला मुख्यमंत्री के रूप में इतिहास रचा
रेखा गुप्ता दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री बन गई हैं। उनसे पहले सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित और आतिशी इस पद पर रह चुकी हैं। अपने चयन के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उनके नेतृत्व में बीजेपी दिल्ली में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश करेगी। अब देखना होगा कि उनकी सरकार किन नीतियों और योजनाओं के साथ दिल्ली की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरती है।
शालीमार बाग से बड़ी जीत, मुख्यमंत्री पद तक का सफर
रेखा गुप्ता ने हाल ही में संपन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में शालीमार बाग सीट से आम आदमी पार्टी की बंदना कुमारी को लगभग 30,000 वोटों से हराया। 2020 के चुनाव में उन्हें मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार उन्होंने जबरदस्त वापसी की। उनकी इस जीत के बाद से ही उन्हें मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में गिना जा रहा था। विश्लेषकों के अनुसार, रेखा गुप्ता का मुख्यमंत्री बनना बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है, जिससे पार्टी महिला और वैश्य समुदाय को साधने की कोशिश कर रही है।

राजनीति में मजबूत पकड़, छात्र राजनीति से पार्षद तक का सफर
रेखा गुप्ता ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत दिल्ली विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के साथ की थी। 1996 में वे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) की अध्यक्ष बनीं, जिससे उनकी नेतृत्व क्षमता उजागर हुई। इसके बाद, 2007 में वे दिल्ली नगर निगम (MCD) के पीतमपुरा (उत्तर) वार्ड से काउंसिलर बनीं। नगर निगम की राजनीति में सक्रिय रहने के बाद, उन्होंने विधानसभा चुनाव में कदम रखा और अब मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गई हैं। उनका यह सफर भारतीय जनता पार्टी में उनकी बढ़ती पकड़ और लोकप्रियता को दर्शाता है।



