मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज महाकुंभ को लेकर गोरखपुर में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन एकता का प्रतीक है। करोड़ों श्रद्धालु यहां आस्था की डुबकी लगाते हैं, जहां जाति, भाषा और क्षेत्र की सभी दीवारें मिट जाती हैं। यह आयोजन भारत की समृद्ध संस्कृति और एकता का जीवंत उदाहरण है।
सनातन धर्म सहिष्णुता और समावेशिता का प्रतीक
सीएम योगी ने भागवत कथा के दौरान कहा कि सनातन धर्म किसी पर अपनी बात थोपता नहीं है। उन्होंने बताया कि समय के साथ कई मजहब और संप्रदाय आए, जिन्होंने अपने विचारों को दूसरों पर थोपने का प्रयास किया, लेकिन सनातन धर्म ने हमेशा सहिष्णुता और समावेशिता का मार्ग दिखाया। यही कारण है कि महाकुंभ जैसे आयोजनों में सभी वर्ग और समुदाय एक साथ नजर आते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के संदेश के साथ एकता की राह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एकता के संदेश को दोहराते हुए कहा कि देश की अखंडता और मजबूती एकता में है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ सनातन संस्कृति की उस धारा को मजबूत कर रहा है, जो भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही है। योगी ने आह्वान किया कि सनातन संस्कृति और महाकुंभ जैसे आयोजन हमें एकता और अखंडता के सूत्र में बांधते हैं।
सनातन धर्म: सादगी और समावेशिता का मार्ग – सीएम योगी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में आयोजित श्रृंगेरी के शंकराचार्यों की भागवत कथा में भाग लेते हुए सनातन धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने हमेशा सादगी और समावेशिता को अपनाया है। योगी आदित्यनाथ ने जोर देते हुए कहा, “सनातन धर्म अपने विचार किसी पर नहीं थोपता, बल्कि यह जीवन के मार्ग को इतनी सहजता और सरलता से प्रस्तुत करता है, जो अन्य किसी धर्म या संप्रदाय में नहीं दिखाई देती।”
सनातन धर्म की निरंतरता और अखंडता
योगी ने आगे कहा कि, “एक समय ऐसा भी था जब यह महसूस हुआ कि सनातन धर्म का अस्तित्व समाप्त हो चुका है, लेकिन आज हम देख रहे हैं कि यह धर्म अपनी निरंतरता और अखंडता को साबित कर रहा है।” उन्होंने महाकुंभ जैसे आयोजनों का उदाहरण दिया, जहां लाखों लोग बिना किसी भेदभाव के आस्था की डुबकी लगाते हैं, और यह सनातन धर्म की सशक्त और जीवित परंपरा को दर्शाता है।



