मार्सिले शहर का भारत की आजादी के संघर्ष से गहरा नाता है। 8 जुलाई 1910 को, जब स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा गिरफ्तार कर भारत लाया जा रहा था, तब उन्होंने इस शहर के तट के पास एक साहसिक प्रयास किया। जहाज से कूदकर तैरते हुए फ्रांस की धरती पर पहुंचे, लेकिन दुर्भाग्यवश वहां ब्रिटिश अधिकारियों ने उन्हें फिर से पकड़ लिया। उनकी गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और कूटनीतिक बहस को जन्म दिया, जिससे यह शहर भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में दर्ज हो गया।
पीएम मोदी ने मार्सिले को कहा धन्यवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस दौरे के दौरान इस ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए मार्सिले शहर को धन्यवाद दिया। उन्होंने इसे भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण स्थल बताया। यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय नेता ने वीर सावरकर के इस साहसिक कार्य को याद किया हो, लेकिन इस बार फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की उपस्थिति में इसे एक नई मान्यता मिली। इससे दोनों देशों के ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंध और मजबूत होंगे।
मार्सिले में भारत का नया वाणिज्य दूतावास
मार्सिले शहर न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आज भी यह फ्रांस का एक प्रमुख व्यापारिक और सामरिक केंद्र है। पीएम मोदी ने यहां भारत के नए महावाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया, जिससे दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। यह कदम भारत और फ्रांस के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय समुदाय को बेहतर सेवाएं देने के लिए भी उठाया गया है।

भारत-फ्रांस संबंधों को नई दिशा
मार्सिले का दौरा भारत-फ्रांस संबंधों को एक नया आयाम देने वाला साबित हो सकता है। यह शहर न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी खास है। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। मार्सिले में नई साझेदारियों और निवेश की संभावनाओं को देखते हुए यह दौरा दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।
सावरकर की वीरता से प्रेरणा
वीर सावरकर की कहानी आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। उनका साहस, स्वाधीनता के प्रति समर्पण और संघर्ष हर भारतीय को देशभक्ति का संदेश देता है। मार्सिले में हुई इस ऐतिहासिक घटना ने यह साबित कर दिया कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सिर्फ भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पड़ा था। पीएम मोदी का यह दौरा इस ऐतिहासिक विरासत को फिर से जीवंत करने और नई पीढ़ी को इसके महत्व से परिचित कराने का अवसर बना।



